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Saturday, February 15, 2014

facebook पर TEEN PATTI प्रतिबन्धित करो



हास्यकवि अलबेला खत्री का पैग़ाम
भारत की पंजाछाप सरकार के नाम
facebook पर TEEN PATTI  प्रतिबन्धित करो 





Friday, October 4, 2013

हँसी के सफ़र पर चला हास्यकवि अलबेला खत्री



बड़ा आनंद अनुभव होता है मन में सफ़र पर जाते वक्त 

क्योंकि  लोग  सर आँखों पर बिठाते हैं  

कविता को और कवियों को ........

हँसी के सफ़र पर चला हास्यकवि अलबेला खत्री
हँसी के सफ़र पर चला हास्यकवि अलबेला खत्री
हँसी के सफ़र पर चला हास्यकवि अलबेला खत्री

हँसी के सफ़र पर चला हास्यकवि अलबेला खत्री

Tuesday, September 10, 2013

गणपति बाप्पा मोरिया, हरो हमारी पीर


गणपति का शुभ आगमन, मांगल्य की खान
स्वागत में दिनरात हम, करें सतत गुणगान

गणपतिजी के कान तक, पहुंचे यह सन्देश
महंगाई में घिर गया, पूरा भारत देश

गणपति बाप्पा मोरिया, हरो हमारी पीर
महंगाई ने भर दिया, नयन नयन में नीर

गणपति बाप्पा आइये, रिद्धि सिद्धि के संग
प्रसराओ इस देश में, सुख  के सुरभित रंग

गणपतिजी अब कीजिये, ऐसा पक्का काम
तन नीरोगी हों सभी, मन में  हो विश्राम
-अलबेला खत्री

ganeshotsav 2013 by hasyakavi albela khatri

ganeshotsav 2013 by hasyakavi albela khatri

ganeshotsav 2013 by hasyakavi albela khatri

Tuesday, September 3, 2013

आसाराम बापू अपने संकट का निवारण करने के लिए यदि निर्मल दरबार में जाते तो वहां ऐसा कुछ होता


आसाराम बापू  अपने पर आये संकट  का निवारण करने के लिए यदि निर्मल  दरबार में  जाते तो वहां शायद ऐसा कुछ होता :

निर्मल बाबा :  भई  कहाँ से आये हैं आप ?

आसाराम     :  जी अभी तो जोधपुर से ही आया हूँ ..वैसे ठिकाने मेरे पूरी दुनिया में फैले हैं ..

निर्मल बाबा  :  करते क्या हैं आप ?

आसाराम      :  जी, लोगों के सांसारिक दुःख दूर करके उन्हें  परमात्मा से मिलाता हूँ , लेकिन  ख़ुद के नहीं मिटा पाया  इसलिए  आपके पास आया हूँ

निर्मल बाबा  :  अर्थात जिस प्रकार  एक हज्जाम अपने बाल दूसरे हज्जाम से कटवाता है  उसी प्रकार आज एक बाबा  दूसरे बाबा के पास  अपने संकट कटाने आया है .....

आसाराम      :   जी बाबा ..आप तो सब जानीजान हैं ....

निर्मल बाबा   :  भई  ये जेल बड़ी आ रही है सामने ..........क्या आपने कभी कोई जेल देखी है ?

आसाराम       :  जी हाँ, आजकल तो सपने में  रोज़ जेल ही दिखाई देती है ...

निर्मल बाबा   :  तो एक बार सपने से निकल कर,  पूरी जागृत अवस्था में कुछ दिन जेल में रह कर आ जाओ, किरपा वहीँ अटकी हुई है ....

आसाराम        :  जी बाबा जी ........बोल निर्मल दरबार की जय

परमपाखण्डी बाबा अलबेलानंदजी परमकंस के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार

https://www.facebook.com/AlbelaKhatrisHasyaKaviSammelan?ref=hl







Wednesday, August 28, 2013

YE BHI KOI AANA HUA KANHA ...........

YE  BHI  KOI  AANA  HUA  KANHA ...........by albela khatri

Saturday, August 17, 2013

रक्षाबन्धन 2013 पर हिंदी हास्यकवि अलबेला खत्री के अनुपम दोहे

राखी का त्यौहार और अलबेला खत्री के दोहे

राखी का त्यौहार और अलबेला खत्री के दोहे

राखी का त्यौहार और अलबेला खत्री के दोहे

राखी का त्यौहार और अलबेला खत्री के दोहे

Tuesday, August 13, 2013

आज़ादी के शहद की बूंद बूंद लो चाट

एक कुण्डलिया छन्द पन्द्रह अगस्त के नाम


आज़ादी के शहद की बूंद बूंद लो चाट

सारे मिलकर हिन्द की ख़ूब लगाओ वाट


ख़ूब लगाओ वाट,  कांग्रेस पार्टी वालो


पी लो पूरा ख़ून, सियासत के चण्डालो


पहने गाँधी छाप, कड़कड़ी उजली खादी


करते जाओ पाप, तुम्हें पूरी आज़ादी


-अलबेला खत्री

एक कुण्डलिया छन्द पन्द्रह अगस्त के नाम by hasyakavi albela khatri

Saturday, August 10, 2013

सी आई डी के श्वान जहाँ सूंघते हुए थाने में आ जाते हैं



चन्द सरफिरे लोग
भारत में
भ्रष्टाचार मिटाने की साज़िश कर रहे हैं

यानी
कीड़े और मकौड़े
मिल कर
हिमालय हिलाने की कोशिश कर रहे हैं

मन तो माथा पीटने को हो रहा है काका
लेकिन मैं फिर भी लगा रहा हूँ ठहाका

क्योंकि इस आगाज़ का अन्जाम जानता हूँ
मैं इन पिद्दी प्रयासों का परिणाम जानता हूँ

सट्टेबाज़ घाघ लुटेरे
दलाल स्ट्रीट में बैठ कर
तिजारत कर रहे हैं
और
जिन्हें चम्बल में होना चाहिए था
वे दबंग सदन में बैठ कर
वज़ारत कर रहे हैं

देश के ही वकील जब देशद्रोहियों के काम आ रहे हों
और
गद्दारी में जहाँ सेनाधिकारियों तक के नाम आ रहे हों

पन्सारी और हलवाई जहाँ मिलावट से मार रहे हों
डॉक्टर,फार्मा और केमिस्ट
रूपयों के लालच में इलाज के बहाने संहार रहे हों

ठेकेदारों द्वारा बनाये पुल
जब उदघाटन के पहले ही शर्म से आत्मघात कर रहे हों
जिस देश में
पण्डित और कठमुल्ले
अपने सियासी फ़ायदों के लिए जात-पात कर रहे हों
और
दंगे की आड़ में
बंग्लादेशी घुसपैठिये निरपराधों का रक्तपात कर रहे हो

वहां
जहाँ
मुद्राबाण खाए बिना
दशहरे का कागज़ी दशानन भी नहीं मरता
और पैसा लिए बिना
बेटा अपने बाप तक का काम नहीं करता

सी आई डी के श्वान जहाँ सूंघते हुए थाने में आ जाते हैं
कथावाचक-सन्त लोग जहाँ हवाला में दलाली खाते हैं

भ्रष्टाचार जहाँ शिष्टाचार बन कर शिक्षा में जम गया है
और रिश्वत का रस धमनियों के शोणित में रम गया है

वहां वे
उम्मीद करते हैं कि
घूस की जड़ें उखाड़ देंगे
अर्थात
निहत्थे ही
तोपचियों को पछाड़ देंगे

तो मैं सहयोग क्या,
शुभकामना तक नहीं दूंगा
न तो उन्हें अन्धेरे में रखूँगा
न ही मैं ख़ुद धोखे में रहूँगा

बस
इत्ता कहूँगा

जाने भी दो यार...........छोड़ो
कोई और बात करो

क्योंकि
राम फिर शारंग उठाले
कान्हा सुदर्शन चलाले
आशुतोष तांडव मचाले
भीम ख़ुद को आज़माले

तब भी भ्रष्टाचार का दानव मिटाये न मिटेगा
वज्र भी यदि इन्द्र मारे, चाम इसका न कटेगा

तब हमारी ज़ात ही क्या है ?
तुम भ्रष्टाचार मिटाओगे
भारत से ?
तुम्हारी औकात ही क्या है ?

अभी, मुन्नी को और बदनाम होने दो
जवानी शीला की गर्म सरेआम होने दो
मत रोको रुख हवाओं के तिरपालों से
आबरू इन्सानियत की नीलाम होने दो

जय हिन्द !
-अलबेला खत्री


Sunday, August 4, 2013

हमारे लोकतंत्र में रंगलाल कौन है, नंगलाल कौन है और कुत्ते कौन हैं ?



रंगलाल चुनाव में खड़े हो गए और जब जीत कर गाँव के सरपंच

बन गए.....तो अपने बेटे नंगलाल से कहा- देखो बेटा ! अब मैं

सरपंच बन गया हूँ तो गाँव में कोई भी दुखी नहीं रहना चाहिए

क्या अपना, क्या पराया, क्या आदमी , क्या पशु-पक्षी...सभी ख़ुश

और नीडर होकर रहें, ये हमारी ज़िम्मेदारी है


नंगलाल - आप चिन्ता मत करो पापा ! मैं सबका ध्यान रखूँगा


सर्दियों का मौसम थाकड़ाके की ठण्ड पड़ रही थीरंगलाल को

दूर कहीं कुत्तों के कूकने की आवाज़ सुनाई दी तो उन्होंने नंगलाल

से कहा- जाओ बेटा ! पता करके आओ.....कुत्ते क्यों रो रहे हैं ....?



नंगलाल बाहर गया और थोड़ी देर बाद आकर बताया कि कुत्ते

बेचारे फ़रियाद कर रहे हैं और ठण्ड से बचने के लिए कोई छत

का सहारा मांग रहे हैंरंगलाल ने तुरन्त एक लाख रूपये देकर

कहा कि कल की कल उनके लिए रैन बसेरा बन जाना चाहिए ...

अगले दिन फ़िर कुत्ते रोने लगे, फिर नंगला को भेजा गया तो

उसने बताया कि छत तो उनको पसंद आई लेकिन सर्दी ज़्यादा है

कुछ ओढ़ने को भी चाहिए .......रंगलाल ने पचास हज़ार दिए और

बोले- सभी के लिए कल की कल कम्बल और रजाइयों का प्रबंध

हो जाना चाहिए



जब तीसरे दिन भी कुत्तों का रोना बंद नहीं हुआ तो रंगलाल ने

पूछा - अब क्या है ? नंगलाल बोला- पापा ! बहुत बेशर्म कुत्ते हैं .......

कहते हैं जब इतनी मेहरबानी की है तो थोड़ी और करदो ..हमारे

भोजन का भी प्रबन्ध कर दो........रंगलाल को दया गई.........

- सही कहते हैं बेटा वो ! क्योंकि सरपंच होने के नाते अपनी

रियाया की हर चीज का ख्याल हमें ही रखना है .....ये लो दो लाख

और कल से गाँव के सभी कुत्तों का दोनों समय का खाना..

हमारी ओर से..नंगलाल ने रूपये लिए और हाँ कर के चला गया



पांचवें दिन रंगलाल निश्चिन्त थे कि आज सभी कुत्ते आराम से

सोयेंगे और हम भी....लेकिन जैसे ही सोने के लिए बिस्तर पर

गए कुत्तों ने फिर कूकना आरम्भ कर दियाअब रंगलाल को

गुस्सा गया...उन्होंने उठाई बन्दूक और बोले- हरामखोरों ने

समझ क्या रखा है ? एक को भी नहीं छोडूंगा..। सब कुछ तो

दे दिया , अब और क्या चाहिए ?



नंगलाल ने कहा - पापा गुस्सा मत करो, आज वे कुछ मांग नहीं

रहे हैं,......... बल्कि आज तो वे आपका धन्यवाद अदा कर रहे हैं

और भगवान् से दुआ कर रहे हैं कि आप सदा ख़ुश रहें..........


इस तरह कुत्ते भोंकते  ही रहे, रंगलाल देता ही गया और

नंगलाल लेता ही गया


प्यारे पाठक  मित्रो


हमारे लोकतंत्र में रंगलाल कौन है,

नंगलाल कौन है और कुत्ते कौन हैं ?



आपके जवाब की प्रतीक्षा रहेगी

-अलबेला खत्री

we love narendra modi



Saturday, August 3, 2013

आतंकवादी अगर हत्यारे हैं तो फिर ये कौन हैं जो व्यापारियों के भेष में मौत की सौदागरी करते हैं



हमारा देश और इस देश का नागरिक जितने बड़े संकट से आज गुज़र

रहा है इतिहास में इसकी कोई मिसाल नहीं मिलती । मौत मौत

और सिर्फ़ मौत का नंगा नाच हो रहा है चारों ओर...............सड़क पे

मौत, ट्रेन में मौत, स्कूल में मौत, अस्पताल में मौत, पुलिस स्टेशन

में मौत, होटल में मौत और घर में बैठे बैठे भी मौत !


आज जब इस पर गहराई से चिन्तन किया तो बहुत सी बातें ज़ेहन

में आयीं ..........वो आपके साथ बांटना चाहता हूँ । भगवान न करे

कि वो सब सच हो, लेकिन अगर वो सब शंकाएं सच हैं तो दोस्तों !

अब जाग जाओ.......और अपनी सुरक्षा अपने हाथ में ले लो

..........क्योंकि अब कानून व्यवस्था से कोई ख़ास उम्मीद नहीं है ।


मैं मेरी सोच और वो सब शंकाएं आपके सामने रखूं तब तक एक

बार इस पर विचार कर लें कि नक्सलवादी और आतंकवादी तो

हत्यारे हैं ही, परन्तु वे अगर हत्यारे हैं तो फिर ये कौन हैं जो

व्यापारियों के भेष में मौत की सौदागरी करते हैं ।


व्यापार में झूठ और हेराफेरी तो लाज़िमी है । क्योंकि व्यापारी

आदमी कितना भी कमाले, उसका मन नहीं भरता ............लेकिन

कमाने का भी कोई कायदा होता है । मिलावट पहले भी होती थी

लेकिन वो मिलावट हम हँसते हँसते मज़ाक में उड़ा देते थे..........जैसे

दूध में पानी की, सब्ज़ियों में पत्तों, डंठलों और नमी की, मसालों में

घटिया और सस्ते मसालों की, देशी घी में डालडा की और मावा में

शक्कर की.........ये मिलावट हमें दुखती तो थी, लेकिन हमारे

स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करके हमारी ज़िन्दगी को बर्बाद नहीं

करती थी।


अब तो दूध ही यूरिया का बन रहा है, मावा भी केमिकल से बन

रहा है, सब्ज़ियों और फलों में घातक रसायनों और रंगों का घालमेल

है, घी के नाम पर सड़ी हुई पशुचर्बी और मसालों में लकड़ी के बुरादे

से ले कर सीमेन्ट तक की मिलावट ???????????????????????


क्या है ये ????????????


अगर नक्सलवादी और आतंकवादी हत्यारे हैं तो फिर ये मिलावट

करने वाले हरामखोर कौन हैं जो हमारे घरों तक घुस आये हैं और

हमारी ज़िन्दगी के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं ?

जय हिन्द
-अलबेला खत्री




Sunday, July 21, 2013

अलबेला खत्री को राखी सावंत कहने वाला ये सतीश सक्सेना कौन है भाई ?


 संयोग से आज ये पढने में आ गया जिसे पढ़ कर  बड़ी दया  आई उन मरदूदों पर  जो सामने से दोस्त बन कर आते हैं  और पीठ पीछे घोस्ट की तरह चलते हैं . ये क्या अनर्गल प्रलाप किया है  मैं पूरी  तरह नहीं  समझा हूँ इसलिए  मैं  चाहता हूँ कि  वो सतीश सक्सेना साहब  ज़रा ये बताने का कष्ट करें कि  जब अलबेला खत्री आपको जानता तक नहीं, तो आपके बारे में क्यों कुछ भी बोलेगा .........ज़बरदस्ती  चर्चा में आने के लिए  मेरा नाम क्यों  घसीट रहे हो प्यारे ?

दिखाओ मुझे वो पोस्ट, जिसमे आपका नाम  मैंने लिया .........रही बात मेरे राखी सावंत होने की  तो पता नहीं आपने मेरा ऐसा कौन सा अंग देख लिया जो उसके जैसा है क्योंकि मेरी रचना तो कमाल की रचना है भाई . इस रचना में ऐसा कोई खोट नहीं .........ऐसी रचना  के साथ आनंद करना चाहिए ..बहस नहीं


http://satish-saxena.blogspot.in/2010/11/blog-post_26.html


Friday, November 26, 2010

तिलयार लेक के इस लेख को "शरीफ ब्लागर" न पढ़ें -सतीश सक्सेना

खुशदीप भाई फोन करके बताया कि अलबेला खत्री ने, अपनी पोस्ट में तिलयार लेक पर, रात्रि भोज और पैग शैग के बाद लिखा कि "सतीश सोने चले गए " ! इस पोस्ट से महसूस होता है कि आप रात  में वहाँ मौजूद थे, जबकि आप उस दिन हमारे साथ थे  ! इसपर क्या स्पष्टीकरण दोगे  ??


ब्लॉगजगत का राखी सावंत कहलाये जा रहे इस मजाकिया कैरेक्टर के लिखे हुए शब्दों में, दोधारी धार तो होती ही है ! अपने द्विअर्थी शब्दों से दादा कोंडके को पीछे छोड़ता यह "कलाकार " वाकई धुरंधर है और आजके रोते पीटते समय और लोगों के बीच, अगर मुझे वाकई जमीन पर बैठ, उस दिन डिनर का मौका मिला होता तो मैं अपने आपको घाटे में नहीं मानता !


इस स्पेशल कैरेक्टर को जानते हुए , मैंने इस पर खुद शिकायत करने से परहेज किया ! खुद शिकायत करने के बदले में अलबेला का जो जवाब मिलता उसका मुझे अंदाजा था कि


"सतीश जी, उस पार्टी में किचन के रसोइये का नाम भी सतीश था  ....हा...हा...हा...हा...." 






Friday, July 5, 2013

सपने में देखा मैंने सपनों का हिन्दुस्तान




आज मुझे सपने में आया सपना एक महान

सपने में देखा मैंने  सपनों का हिन्दुस्तान


क्या नर-नारी,क्या किन्नर,क्या बूढ़े और जवान

चेहरों पर थी चमक सभी के, अधरों पर मुस्कान

मैंने देखा  पुलिसकर्मियों में  विनम्र स्वभाव

मैंने देखा सस्ते होगये  फल-सब्ज़ी   के भाव

मैंने देखा रेलों में  कोई धक्कम-पेल नहीं है

मैंने देखा किसी शहर में  कोई जेल नहीं है

भ्रष्टाचारी लोग कर चुके  ख़ुद ही आत्म-समर्पण


स्विस बैंकों से ला-ला कर धन किया देश को अर्पण

सोने के सिक्के चलते और  चलें चांदी के नोट

युवकों ने चड्डी उतार  कर, पहन लिए लंगोट

व्यसन और फ़ैशन से दूरी रखना मान लिया है

काला बाज़ारी नहीं करेंगे, सबने ठान लिया है


नहीं मिलावट मिली कहीं पर, शुद्ध है सब सामान

सपने में देखा मैंने  सपनों का हिन्दुस्तान 



सिर्फ़ एक टी वी चैनल और सिर्फ़ एक अखबार

क्रिकेट मैच भी हो पता है साल में बस इक बार 


क्षण-क्षण  का उपयोग हो रहा मानवता के हित में

अय्याशी और अनाचार अब नहीं किसी के चित में

काव्य-मंचों पर  मौलिक कविताओं का युग आया है

साहित्य और संस्कृति का परचम घर-घर फहराया है

मल्लिकाओं ने साड़ी पहनने का ऐलान किया है


अमिताभ बच्चन ने ख़ुद को बूढ़ा मान लिया है

पेप्सी-कोक की जगह दूध के विज्ञापन दिखते हैं

सलीम-जावेद फिर से जोड़ी बन, फ़िल्में लिखते हैं

अब रोज़ाना लड़ते नहीं हैं शाहरुख और सलमान

सपने में देखा मैंने सपनों का हिन्दुस्तान



भ्रूणहत्याएं बन्द हो गईं, दहेज़ प्रथा भी  बन्द

शोषण से हुई मुक्त नारियां, करती हैं  आनन्द

आतंकवादी  रक्तदान को  लाइन में खड़े हुए हैं

चोरों ने चोरी छोड़ी, घर खुल्ले  पड़े हुए हैं

मदिरा-गुटखा कम्पनियों पर लटक रहे हैं ताले

नदियाँ  तो नदियाँ, शहरों में साफ़ हो गये नाले

चौबीस घंटे  चालू रहता  फैक्ट्रियों में काम

रंगदारी और लूटपाट का होगया काम तमाम


दुनिया भर ने फिर से माना भारत को उस्ताद

चारों तरफ़ ख़ुशियाँ  ही ख़ुशियाँ, नहीं कहीं अवसाद

घुटनों के बल खड़ा हमारे  आगे पाकिस्तान

सपने में देखा मैंने सपनों का हिन्दुस्तान

जय हिन्द
-अलबेला खत्री 



Wednesday, July 3, 2013

कुछ लोग कह रहे हैं कि कांग्रेसियों के कीड़े पड़ेंगे लेकिन अलबेला खत्री कहता है नहीं पड़ेंगे



जो लोग कांग्रेसियों को कीड़े पड़ने की बात करते हैं  वे किसी भरम में न रहें .


 कांग्रेसियों को कीड़े  पड़ने का  श्राप मत दीजिये . क्योंकि  मैं जानता  हूँ कि  

नहीं पड़ेंगे . बिलकुल नहीं पड़ेंगे . किसी भी प्रजाति का एक भी कीड़ा किसी 

भी कांग्रेसी के किसी भी अंग में नहीं पड़ेगा .   भरोसा न हो तो एक बार स्वयं 

कीड़ों  से ही पूछ कर देख लो . वो  मना  कर देंगे . आखिर उनका भी कोई 

स्टैण्डर्ड है ! 


कीड़े जानते हैं  कि अगर वे कांग्रेसियों को पड़े तो उनके  भी कीड़े पड़ेंगे .


जय हिन्द ! 





Tuesday, June 25, 2013

नोट : इस रचना का आनंद केवल नेता लोग ही ले सकते हैं



चार चोर मिल कर एक जगह चोरी कर सकते हैं


चार डाकू मिल कर एक जगह डाका डाल सकते हैं


चार ठग मिल कर एक आदमी को ठग सकते हैं


चार झूठे मिल कर एक झूठ का प्रचार कर सकते हैं 




चार गिद्ध मिल कर एक लाश  को चबा सकते हैं


चार कुत्ते  मिल कर एक रोटी को खा  सकते हैं


चार गधे मिल कर एक  खेत को चर सकते हैं


चार मेंढक मिल कर रात भर शोर कर सकते हैं 




चार गुण्डे  मिल कर एक साथ  बलात्कार कर सकते हैं 


चार दलाल मिल कर बाज़ार में अन्धकार कर सकते हैं


चार  भड़वे मिल कर वासना  का कारोबार कर सकते हैं


चार सटोरिये मिल कर  खेलों में व्यभिचार कर सकते हैं



__तो फिर चार खादी वाले मिल कर देश नहीं चला सकते ?  


जबकि उन में इनके सारे गुण, अवगुण और तत्व मौजूद है .


ज़रा सोचिये : 


क्या सारे कांग्रेसी चोर हैं  और क्या सारे भाजपाई  शरीफ हैं ?  नहीं, नहीं, नहीं ! 


तो फिर  झगडा किस बात का  यारो,  अगर देशहित में राजनीति करने का दावा 

करते हो तो इस देश के लिए सभी दल मिल कर एक क्यों नहीं हो जाते ?


चोरी-चोरी, चुपके-चुपके व अलग-अलग  खाने की क्या मज़बूरी है भाई,  ये देश 


हमारा अपना  है .इसे मिल कर खाओ, एक साथ खाओ और दूसरे को खिला  

खिला कर खाओ ताकि  कहीं कोई विरोध होने का डर ही न रहे


जय हिन्द ! 



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