कहाँ गये वे शिखण्डी लोग ?
और कहाँ गये वो गन्दी गन्दी गालियों से मेरा
dahboard मैला करने वाले
तथाकथित भद्र लोग
जो ज़बरदस्ती के ठेकेदार बने फिरते हैं ...............हैं ? क्या कहा ?
समय नहीं मिला ?
पता नहीं चला ?
ऐसी फ़ालतू बात के लिए वक्त नहीं ?
देश बचाने के लिए विचार मांगे तो सांप सूंघ गया क्या ?
अरे आओ !
अलबेला खत्री आपको दावत देता है -
१५००० हिदी ब्लोगर्स में क्या सिर्फ़ ८-१० लोग ही हैं जिनके पास
देश को बचाने की सोच है,
बाकी क्या केवल तमाशा देखने आते हैं ?
वाह रे वाह !
काम जब हम को पड़ा तो लीडर नहीं मिले
देश पर जब कुछ लिखा तो रीडर नहीं मिले
जय हो !

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