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Wednesday, January 20, 2010

कभी न कलम मिटे देवी माता शारदे !




सुरों
की सरिता आप,

शब्दों की संहिता आप

कवि की कविता आप देवी माता शारदे !


हंस पे सवार नित,

वीणा की झंकार नित

सुनती पुकार नित देवी माता शारदे !


थोड़ा सा मैं ज्ञान माँगूं,

विद्याधन दान माँगूं

इक वरदान माँगूं देवी माता शारदे !


जन पे ज़ुलम मिटे,

भारत से तम मिटे,

कभी न कलम मिटे देवी माता शारदे !



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