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Wednesday, June 8, 2011

वैकुण्ठ में मोहन और मीरा दोनों हँस रहे होंगे




वो
ज़माना और था जब मीरा मोहन ...मोहन ...पुकारती रही ....और

लोग
उसका विरोध करते रहे.... वो मीरा मोहन ......मोहन........ गाते

हुए
स्वयं मोहन हो गई ....लेकिन मोहन के साथ ......उसका सम्बन्ध

केवल
आत्मिक रहा , दैहिक नहीं । अब ज़माना और है .....अब तो

मीरा
लोकसभा की अध्यक्ष है भाई.......अब तो मनमोहन को भी

कुछ
बोलना होगा तो वे उन्हें ......'आदरणीय अध्यक्ष महोदय ' ही

कह
कर बुलाएँगे


जियो ..जियो ..आज तो वैकुण्ठ में मोहन और मीरा दोनों हँस रहे

होंगे
और रुक्मणीजी दोनों को हँसते देख वैसे ही जल रही होगी

जैसे
यहाँ माया जी जल रही हैं .........हा हा हा हा हा हा हा हा


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Friday, April 29, 2011

जैसे नेता, वैसी कविता...................




फ़िल्म : लगान
तर्ज़ : मधुबन में जो कन्हैया...



संसद में जो सोनिया मनमोहन से मिले

कभी मुस्काये, कभी घूरे, कभी साथ चले

माया कैसे ना जले


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