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Saturday, July 2, 2011

रंगलाल और नंगलाल ने किया मानसून पर चिन्तन





रंगलाल और नंगलाल आज गम्भीर थे और बरसात पर

चिन्तन कर रहे थे ।


रंगलाल : बेटा नंगू ! जब बरसात के कारण बाढ़ आती है और

लोग मरते हैं तो मुझे बहुत दुःख होता है । अगर भगवान ने चाहा

तो मैं एक ऐसी सुरंग बनाऊंगा जिसमे पूरे शहर के लोग अपने

ज़रूरी सामान के साथ समा सके और स्वयं को बाढ़ के प्रकोप से

बचा सके ।



नंगलाल : बहुत नेक ख्याल है आपका । लेकिन पापा, लोग बाढ़ से ही

नहीं, सूखे से भी परेशान हैं । कई क्षेत्रों में बादल तो आते हैं पर बरसते

नहीं । तो ऐसे बादलों को काबू करने के लिए मैं इत्ता लम्बा लट्ठ

बनाऊंगा जिससे धरती पर बैठे बैठे ही बादल में सुराख़ करके उसे

बरसा सकूँ ।


रंगलाल : शाबास नंगू ! लेकिन इत्ता बड़ा लट्ठ तू रखेगा कहाँ ?


नंगलाल : आपकी सुरंग में..................हा हा हा हा


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Wednesday, June 15, 2011

रंगलाल व नंगलाल जैसे लोग भी दुखी है, भला ब्याह करके कौन सुखी है ?






रंगलाल और उसका बेटा नंगलाल दोनों परेशान हैं


रंगलाल : बेटा अब तेरी माँ को क्या कहूँ ?

कमबख्त सब्ज़ी मण्डी में सब्ज़ी भी ऐसे खरीदती है

जैसे सोना खरीद रही हो


नंगलाल : आप तो बड़ी किस्मत वाले हैं पापा ! मुसीबत तो मेरी है ।

आपकी बहू तो सोना भी ऐसे खरीदती है जैसे सब्ज़ी खरीद रही हो ..हा हा हा



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Wednesday, May 4, 2011

नशा है या मौत का सामान, कर दो सभी को सावधान




गुटखा ये पाउच वाला, जिसने भी मुंह में डाला

गुटखा ले लेगा उसकी जान

कर दो सभी को सावधान.......................


कितने ही मर गए इससे,कितने ही मिट गए इससे

बूढे बालक नौजवान

कर दो सभी को सावधान ...............................


संतूर तुलसी शिमला गोवा दरबार कोई

मानिकचंद मूलचंद हो या अनुराग कोई

हो चाहे रजनीगंधा पानपराग कोई

सबके सब हैं ज़हरीले

कत्थई भूरे या पीले

सब के सब हैं एक समान

करदो सभी को सावधान ............................



सडियल सुपारी डाली,
सस्ता ज़र्दा मिलाया

लौंग इलायची खुश्बू ठंडक किवाम दिखलाया

बाकी बस खड़िया मिटटी, कत्था चूना लगाया

चमड़ी छिपकलियों वाली

साँपों की हड्डियाँ डाली

नशा है या मौत का सामान

कर दो सभी को सावधान ................................



तिल्ली को खा जाता है पथरी अल्सर देता है

किडनी का दुश्मन है ये कैंसर भी कर देता है

खाने वाले का जीवन बर्बाद कर देता है

सबसे गन्दी बीमारी

चालू रहती पिचकारी

दफ्तर हो घर हो या दुकान

कर दो सभी को सावधान ...............................


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Friday, October 8, 2010

हम ऊंट को ले आते हैं वो आप को देख लेगा ......




अभी तीन दिन पहले अहमदाबाद में बहुत बड़ा कवि सम्मेलन

था दी गुजरात एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन यानी सरल शब्दों

में बिल्डर्स एसोसिएशन का जिसमे देश भर के ख्यातनाम कवि-

कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया । उस भव्य कवि-सम्मेलन का मंच

सञ्चालन किया था दिल्ली के गजेन्द्र सोलंकी ने ।



चूँकि मैं कद-काठी में ठीक-ठाक हूँ इसलिए मुझे प्रस्तुत करते हुए

गजेन्द्र सोलंकी ने यह कह कर बुलाया कि ये देश का सबसे लम्बा

कवि है जो खड़ा हो कर देखे तो संतरे भी निम्बू दिखाई देते हैं........

इस चुटकी पर लोगों ने ख़ूब ठहाका लगाया । लेकिन अपन तो ठहरे

अपन !


मैंने खड़े होते ही कहा कि भाई मैं तो बिलकुल भी लम्बा नहीं हूँ,

लम्बे तो थे मेरे पूज्य पिताजी, जो एक बार जैसलमेर गये और

लोगों से कहा कि भाई मुझे ऊंट दिखाओ, ऊंट देखना है । उनकी बात

सुन कर लोगों ने पिताजी को नीचे से ऊपर देखा और कहा कि साहब

आप क्यों तकलीफ़ करते हैं ? हम ऊंट को ले आते हैं, वो आप को

देख लेगा ...हा हा हा हा हा हा हा हा


इस बात पर हमारे संयोजक राजकुमार भक्कड़ ने तो ठहाका

लगाया ही उनके पिताश्री नारायणदास भक्कड़ भी अपनी हँसी

नहीं रोक पाए ।


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