Showing posts with label हास्य. Show all posts
Showing posts with label हास्य. Show all posts

Thursday, June 30, 2011

अब जो दे, उसका भी भला और जो न दे उसका भी { भला मैं क्या बिगाड़ लूँगा }




देखो जी प्यारे स्वजनों ! न तो मैंने ढोल बजाया और न ही आतिशबाज़ी

की है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मेरा मन ख़ुश नहीं । भला कौन

ब्लोगर ख़ुश नहीं होता अपनी 1000 वीं पोस्ट पर ?



मैं भी हूँ और बहुत ख़ुश हूँ आज । अब आपको बधाई देनी है तो दो,

नहीं देनी तो मत दो । मैं कोई अन्ना हज़ारे या बाबा रामदेव की भान्ति

अनशन तो कर नहीं सकता आपकी टिप्पणियों के लिए . अरे ये तो

हास्यकवि अलबेला खत्री का ब्लॉग है, कोई BMW यानी बहन

मायावती

का जन्मदिन थोड़े ही है जो मर्ज़ी न मर्ज़ी माला पहनानी ही पड़े ।



हज़ारवीं पोस्ट यहाँ लगी है ...मेरे मुख्य ब्लॉग पर

http://albelakhari.blogspot.com/2011/06/blog-post_30.html


सूचना देना मेरा काम था सो मैंने कर दिया । अब जो दे, उसका भी भला

और जो न दे उसका भी { भला मैं क्या बिगाड़ लूँगा } हा हा हा हा हा

वैसे कहना मत किसी से........इस ब्लॉग पर 1000 पोस्ट तो कभी की

हो जातीं अगर मेरे बहुत सारे ब्लॉग न होते...हो हो हो हो हो


hasyakavi,sammelan,albela khatri,hindi blogger,badhaai,post,1000,bmw,mayavati,anna,baba
















Wednesday, June 15, 2011

रंगलाल व नंगलाल जैसे लोग भी दुखी है, भला ब्याह करके कौन सुखी है ?






रंगलाल और उसका बेटा नंगलाल दोनों परेशान हैं


रंगलाल : बेटा अब तेरी माँ को क्या कहूँ ?

कमबख्त सब्ज़ी मण्डी में सब्ज़ी भी ऐसे खरीदती है

जैसे सोना खरीद रही हो


नंगलाल : आप तो बड़ी किस्मत वाले हैं पापा ! मुसीबत तो मेरी है ।

आपकी बहू तो सोना भी ऐसे खरीदती है जैसे सब्ज़ी खरीद रही हो ..हा हा हा



hasyakavi,kavisammelan,sensex,albela khatri,surat,baba,garbi rachnakar,joks,hasya

Tuesday, June 7, 2011

जूता जब बोलता है तो ख़ूब बोलता है.........सुनिए, क्या कहता है ?






माहौल बहुत गर्म था। गर्म क्या था, उबल रहा था। वक्ताओं द्वारा लगातार

असंसदीय भाषा का प्रयोग करने से सदन में संसद जैसा दृश्य
उपस्थित

हो चुका था। सभी को बोलने की पड़ी थी, सुनने को कोई राजी नहीं
था।

गाली-गलौज तक पहुंच चुकी बहस किसी भी क्षण हाथा-पाई में भी
तब्दील

हो सकती थी। तभी अध्यक्ष महोदय अपनी सीट पर खड़े हो गए
और माइक

को अपने मुंह में लगभग ठूंसते हुए बोले, 'देखिए.. मैं अन्तिम
चेतावनी

यानी लास्ट वार्निंग दे रहा हूं कि सब शान्त हो जाएं क्योंकि हम लोग
यहां

शोकसभा करने के लिए जमा हुए हैं, मेहरबानी करके इसे
लोकसभा

न बनाइए। प्लीज..अनुशासन रखिए और यदि नहीं रख सकते
तो

भाड़ में जाओ, मैं सभा को यहीं समाप्त कर देता हूं।



अगले ही पल
सब

शान्त हो चुके थे। मानो सभी की लपर-लपर चल रही .जुबानों
को

एक साथ लकवा मार गया हो। अवसर था अखिल भारतीय जूता
महासंघ

के गठन का जिसकी पहली आम बैठक में भाग लेने हज़ारों जूते-
जूतियां

एकत्र हुए थे।



एक सुन्दर और आकर्षक नवजूती ने खड़े होकर माइक संभाला,

'आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मंच पर विराजमान विदेशी कंपनियों के

सेलिब्रिटी अर्थात्‌ महंगे जूते-जूतियों और सदन में उपस्थित नए-पुराने,

छोटे-बड़े, मेल-फीमेल स्वजनों.. मेरे मन में आज वैधव्य का दुःख तो

बहुत है, लेकिन ये कहते हुए गर्व भी बहुत हो रहा है कि मेरे पति तीन साल

तक लगातार अपने देश-समाज और स्वामी की सेवा करते हुए अन्ततः

शहीद हो गए। उनका साइज भले ही सात था लेकिन मजबूत इतने थे कि

दस नंबरी भी शरमा जाएं।



सज्जनो, जिस दिन उनका निर्माण हुआ, उसके अगले ही दिन एक बहादुर

फौजी के पांवों ने उन्हें अपना लिया। भारतीय सेना का वो शूरवीर सिपाही

लद्दाख और सियाचीन जैसी बर्फ़ीली जगहों पर तैनात रह कर जब तक

अपनी सीमाओं की रक्षा करता रहा तब तक मेरे पति ने जी जान से उनके

पांवों की रक्षा की। गला कर बल्कि सड़ा कर रख देने वाली बर्फ़ीली

चट्टानों और भीतर तक चीर देने वाली तेज़-तीखी शीत समीर से

जूझते हुए वे स्वयं गल गए, गल-गल कर खत्म हो गए परन्तु अपनी

आख़री सांस तक अपने स्वामी के पांवों को ठंडा नहीं होने दिया। मुझे

अभिमान है उनकी क़ुर्बानी पर और मैं कामना करती हूं कि हर जनम

में मुझे पति के रूप में वही मिले चाहे हर बार मुझे भरी जवानी में ही

विधवा क्यूं न होना पड़े, इतना कह कर वह जूती सुबकने लगी।

पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। किसी ने नारा लगाया,

जब तक सूरज चान्द रहेंगे, जूते जिन्दाबाद रहेंगे।



एक अन्य मंचासीन जूता बोला, 'भाइयो और बहनो, आदिकाल से लेकर

आज तक, मानव और जूतों का गहरा सम्बन्ध रहा है। हमने सदा

मानव की सेवा की है और बदले में मानव ने भी हमारा बहुत ख्याल

रखा है, अपने हाथों से हमें पॉलिश किया है, कपड़ा मार-मार कर

चमकाया है यहां तक कि मन्दिर में भी जाता है तो भगवान से ज्य़ादा

हमारा ध्यान रखता है कि कोई हमें चुरा न ले, उठा न ले। मित्रो, त्रेतायुग

में तो हमारे पूज्य पूर्वज खड़ाउओं ने अयोध्या के सिंहासन पर बैठकर

शासन भी किया है। लेकिन आज हमारी अस्मिता संकट में है।

हम मानवोपकार के लिए सदा अपना जीवन अर्पित करते आए हैं, लेकिन

आज घृणित राजनीति में घसीटे जा रहे हैं और सम्मान के बजाय उपहास

का पात्र बनते जा रहे हैं। कभी कोई असामाजिक तत्व हमारी माला बनाकर

महापुरुषों की प्रतिमा पर चढ़ा देता है तो कभी कोई हमारे तलों में हेरोइन

या ब्राउन शुगर छिपा कर तस्करी कर लेता है। आजकल तो हम हथियार

की तरह इस्तेमाल होने लगे हैं, जब और जिसके मन में आए, कोई भी

हमें किसी नेता पर फेंककर ख़ुद हीरो बन जाता है और हमारे कारण

दो दो वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक हत्या हो जाती है बेचारे सज्जन लोग

टिकट से ही वंचित हो जाते हैं। इतिहास साक्षी है, हम अहिंसावादी हैं।

हम न अस्त्र हैं, न शस्त्र हैं लेकिन ये हमारी प्रतिभा है कि अवसर पड़े तो

हम दोनों तरह से काम आ सकते हैं। हमारी इसी योग्यता का लोगों ने

मिसयूज किया है। हमें......शोषण और अत्याचार के विरूद्ध

आवाज़ उठानी होगी।



हां, हां, उठानी होगी, सबने एक स्वर में कहा


इसी तरह और भी अनेक मुद्दे हैं जिनपर हमें एकजुट होकर काम

करना पड़ेगा और अपने हक के लिए संगठित होकर संघर्ष करना

पड़ेगा। जय जूता, जय जूता महासंघ।



सदन में तालियों के साथ नारे भी गूंज उठे

- जूतों तुम आगे बढ़ो जूतियां तुम्हारे साथ है,

हिंसा से अछूते हैं - हम भारत के जूते हैं....इंकलाब-जिन्दाबाद


albela khatri,baba,indian poetry,hasyakavi,ramdev, satyagrah, patanjali














Wednesday, May 4, 2011

नशा है या मौत का सामान, कर दो सभी को सावधान




गुटखा ये पाउच वाला, जिसने भी मुंह में डाला

गुटखा ले लेगा उसकी जान

कर दो सभी को सावधान.......................


कितने ही मर गए इससे,कितने ही मिट गए इससे

बूढे बालक नौजवान

कर दो सभी को सावधान ...............................


संतूर तुलसी शिमला गोवा दरबार कोई

मानिकचंद मूलचंद हो या अनुराग कोई

हो चाहे रजनीगंधा पानपराग कोई

सबके सब हैं ज़हरीले

कत्थई भूरे या पीले

सब के सब हैं एक समान

करदो सभी को सावधान ............................



सडियल सुपारी डाली,
सस्ता ज़र्दा मिलाया

लौंग इलायची खुश्बू ठंडक किवाम दिखलाया

बाकी बस खड़िया मिटटी, कत्था चूना लगाया

चमड़ी छिपकलियों वाली

साँपों की हड्डियाँ डाली

नशा है या मौत का सामान

कर दो सभी को सावधान ................................



तिल्ली को खा जाता है पथरी अल्सर देता है

किडनी का दुश्मन है ये कैंसर भी कर देता है

खाने वाले का जीवन बर्बाद कर देता है

सबसे गन्दी बीमारी

चालू रहती पिचकारी

दफ्तर हो घर हो या दुकान

कर दो सभी को सावधान ...............................


hasya,kavi,kavi sammelan,albela khatri,comedy,surat,gujarat,artist














Labels

Followers

Powered By Blogger

Blog Archive