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Monday, June 6, 2011

एक फूंक भर हवा थी जिसे तूने आंधी बना दिया...... एक साधारण से महात्मा को गांधी बना दिया





वाह री मेरे देश की दिल्ली सरकार !

रात ही रात में कर दिया चमत्कार ?


एक फूंक भर हवा थी जिसे तूने आंधी बना दिया

एक साधारण से महात्मा को गांधी बना दिया



अब ये आंधी

अर्थात गांधी



तेरी चूलें हिला देगा


मिट्टी में मिला देगा तेरे तमाम इन्तेज़ाम को


चूँकि उम्मीदें बहुत जगी हैं इससे अवाम को



इसलिए अवाम का हाथ अब इसके साथ होगा


और तेरे पंजे में अब केवल तेरा ही हाथ होगा



देखना तमाशा, आगे आगे होता है क्या


ये तो इब्तिदा है गालिबन रोता है क्या



तूने उसकी एक रात भारी की है ?

नहीं !

नहीं !!

नहीं !!!

तूने अपनी मर्ग की तैयारी की है



तूने जो दी है मासूमों को सज़ा


वो पलटेगी बन कर के कज़ा


तमाशबीनों को मज़ा ही मज़ा



ख़ुदा खैर करे डार्लिंग............


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