इस से पहले वाली पोस्ट में
मैंने एक सरल सा सवाल पूछा था
जिसके जवाब हेतु चार घंटे का समय दिया था
लेकिन बधाई के पात्र हैं श्री जी के अवधिया जी जिन्होंने
चार मिनट में ही सही जवाब मेरे मुँह पर मार दिया ...........
उनके पीछे-पीछे ही फ़टाफ़ट बबलीजी, पी डी जी,मुरारी पारीकजी,
पं डी के शर्मा 'वत्स' जी, श्री रूपचंद्र शास्त्रीजी और आख़िर में
श्री राज भाटिया जी ने भी सही जवाब दिया..........
तो विधिविधान अनुसार प्रथम विजेता घोषित हुए
श्री अवधिया जी !
और बाकी सब उप विजेता ...........पुरूस्कार स्वरुप सभी
विजेताओं को चार - चार आलू परांठे और शलगम का सौ सौ
ग्राम अचार तब भेन्ट किया जाएगा जब मैं ढाबा खोलूँगा _________हा हा हा हा
अनिल पुसदकरजी भयंकर मूडी आदमी हैं
ये तो हम सब जानते ही हैं ।
बड़ी सुलझी किस्म के उलझे हुए
पत्रकार और समाजसेवी हैं,
ये भी हम जानते हैं लेकिन एक नई बात पता चली,
वे बड़े प्रयोगधर्मी भी हैं । नए नए काम करते रहते हैं
और अच्छा करते हैं लेकिन उन्हें सलाह देने वाले शरद कोकास,
बी एस पाबला, राजकुमार ग्वालानी और ललित शर्मा जैसे
मित्र उनकी वाट लगा डालते हैं ।
अभी हाल ही, अनिलजी ने रायपुर में एक शानदार ढाबा खोला,
ये सोच कर कि खूब चलेगा और इस काम में कमाई भी खूब है ,
आलीशान सजावट भी की और कैश काउंटर पर सुन्दर सुकन्या
भी बिठाई और बोर्ड भी लगाया कि हमारे यहाँ बिल्कुल घर जैसा
खाना मिलता है । और तो और उधार की महाकर्षक सुविधा भी दी
लेकिन बढ़िया से बढ़िया खाना होने के बावजूद कोई ग्राहक खाने
के लिए नहीं आया ?
बताओ क्यों ?
क्यों ?
क्यों ?
क्यों ?
आपके जवाब के लिए समय सीमा 4 घंटे
और आपका समय शुरू होता है अब.............
नोट : जवाब इसी आलेख में छिपा व छपा है ।