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Saturday, July 2, 2011

रंगलाल और नंगलाल ने किया मानसून पर चिन्तन





रंगलाल और नंगलाल आज गम्भीर थे और बरसात पर

चिन्तन कर रहे थे ।


रंगलाल : बेटा नंगू ! जब बरसात के कारण बाढ़ आती है और

लोग मरते हैं तो मुझे बहुत दुःख होता है । अगर भगवान ने चाहा

तो मैं एक ऐसी सुरंग बनाऊंगा जिसमे पूरे शहर के लोग अपने

ज़रूरी सामान के साथ समा सके और स्वयं को बाढ़ के प्रकोप से

बचा सके ।



नंगलाल : बहुत नेक ख्याल है आपका । लेकिन पापा, लोग बाढ़ से ही

नहीं, सूखे से भी परेशान हैं । कई क्षेत्रों में बादल तो आते हैं पर बरसते

नहीं । तो ऐसे बादलों को काबू करने के लिए मैं इत्ता लम्बा लट्ठ

बनाऊंगा जिससे धरती पर बैठे बैठे ही बादल में सुराख़ करके उसे

बरसा सकूँ ।


रंगलाल : शाबास नंगू ! लेकिन इत्ता बड़ा लट्ठ तू रखेगा कहाँ ?


नंगलाल : आपकी सुरंग में..................हा हा हा हा


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Monday, November 29, 2010

मैं आपको एक राज़ की बात बता रहा हूँ , प्लीज़ आप किसी को बताना मत......


जो बात कोई नहीं जानता वो मैं जानता हूँ,

राज़ की बात है लेकिन आज मन में लहर गई

इसलिए आपको बता रहा हूँ

प्लीज़ आप किसी को मत बताना -


"फोटोग्राफ़र वही आदमी बनता है

जिसे बचपन से ही

पराये घरों में झाँकने की आदत होती है .."

हा हा हा हा


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