रंगलाल को बहुत ज़ोर से आ रहा थालेकिन वो कर नहीं पा रहा थाकरने में और कोई दुविधा नहीं थीपरन्तु करता कैसेमुम्बई की भीड़ में एकान्त की सुविधा नहीं थीबेचारे के साथ अजीब टंटा हो गयारोके रोके जब पूरा एक घंटा हो गयाभीतर के जल का ज्वारजब सब्र के बाँध से भी बड़ा हो गयातो उसने आव देखा न तावएक झाड़ की ले ली आड़औरदुनिया वालों से मुँह फेर कर खड़ा हो गयाएक पुलिस वाला देख रहा थावो आयाडंडा दिखाया और बोला - चलो !रंगलाल बोला - चलो..............चालोअरे हालो रे हालो........पण मोटा भाई पहले सुबूत तो उठालो !आज ये सामान यहाँ से नहीं उठाओगे
तो कल अदालत में क्या दिखाओगे ?

