आज बड़ा ख़ास दिन था मेरे लिए भी, मेरे बड़े भाई के लिए भी
और मेरे परिवार के लिए भी...........क्योंकि आज इस कवि-
सम्मेलनीय श्रंखला का आखरी प्रोग्राम करके मुझे घर जाना
था मेरा बेटा बीमार है और लगातार मुझे याद कर रहा है, आज
ही मेरे बड़े भाई साहेब की बाई पास सर्जरी हुई है जिससे पूरे
परिवार की सांसें थमी हुई हैं ।
मैं आज दिन भर श्री सुखमनी साहेब का पाठ करना चाहता था
पर नहीं कर सका। क्योंकि समय नहीं मिला, भाईजी की
सर्जरी सफलता पूर्वक सम्पन्न हो चुकी है और घर के सब लोग
उनके होश में आने की बाट जोह रहे हैं, ऐसे में मुझे मेरी माँ के
पास होना चाहिए था .........लेकिन नहीं हूँ क्योंकि जिन लोगों ने
मुझे लेकर शो आयोजित किया था उन्होंने मुझे साफ़ कह दिया
कि अगर आप नहीं रहोगे, तो हमारा प्रोग्राम फ्लॉप हो जायेगा ........
क्या करता मैं ? झख मार कर मुझे लोगों को हँसाना पड़ा..........
भले ही माँ की आँखों से आँसू बह रहे थे......और उन्हें ढाढस देने के
लिए केवल बांसुरी वाला ही घर में था ..बाकी सब तो अस्पताल
में थे...........
खैर ...भतीजे का फोन आ गया है कि भाई साहेब की सर्जरी हो
चुकी है और वे अभी ICU में शिफ्ट कर दिये गये हैं । कल मुझे
एक फ़िल्म साइन करने के लिए मुम्बई में रहना है, कल ही
सूरत में अपने बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना है और कल ही
जयपुर में भाई साहेब को देखना और माँ से मिलना है लेकिन
मैं इनमे से एक भी काम नहीं कर पाऊंगा क्योंकि 20 फरवरी
को होने वाले एक बड़े इवेन्ट के लिए मुझे आज रात ही दो
कव्वालियाँ और पूरी स्क्रिप्ट लिख कर देनी है । यदि ये काम नहीं
किया तो मार्केट में नाम खराब हो जाएगा और नाम खराब होने पर
कितना नुक्सान होता है इसका मुझे पूरा अनुभव एक बार हो
चुका है,,,,,,,,,,,लिहाज़ा अब मैं बैठ रहा हूँ लिखने के लिए............
इतना समय भी मेरे पास नहीं है कि आधा घंटा प्रभु का ध्यान
करके अपने अग्रज के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर सकूँ...........
ये दर्द है एक कलाकार का ....उस कलाकार का जिसने कभी रोना
और रुलाना सीखा ही नहीं...बस हँसना और हँसाना ही सीखा है ।
लेकिन आज चूँकि मेरा स्वास्थ्य भी बहुत खराब है इसलिए एक
गड़बड़ हो गई कि मेरी भी हिम्मत जवाब दे गई और एक बार फिर
मैंने सिगरेट सुलगाली.................. बड़ी मुश्किल से छूटी थी.....
पता नहीं अब वापिस कब छोड़ पाऊंगा.........
क़मर जलालाबादी का शे'र याद आता है -
खुशियाँ मिलीं तो उनको ज़माने में बाँट दी
और ग़म मिला तो अपने ही घर ले के आ गया
लेकिन मैं छोटा आदमी हूँ, मैंने तो आज मेरा दर्द भी आपसे बाँट दिया
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