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Sunday, July 18, 2010

सिर्फ़ दिखलाने के लिए - और एकदम उपयोगिता रहित




यश
वह है जो लोग-लुगाई हमारे विषय में सोचते हैं ,

चरित्र वह है जो ईश्वर और देवता हमारे विषय में जानते हैं


-पेन



बिना चरित्र के ज्ञान शीशे की आँख की तरह है -

सिर्फ़ दिखलाने के लिए - और एकदम उपयोगिता रहित


-स्विनोक





Friday, June 18, 2010

देश तुम्हें पुकार रहा है देश की बेटी !






झांसे वाली रानियों के राज में

झाँसी वाली रानी को सादर श्रद्धांजलि देते हुए

मेरा कवि मन थोड़ा सा खिन्न है

क्योंकि आज स्थिति भिन्न है

इसके बावजूद

तम का पहरा है

ये दर्द गहरा है

___________काश !

तुम एक बार फिर आती............

तो शायद बात बन जाती

देश तुम्हें पुकार रहा है देश की बेटी !

तुम्हारी जय हो ---


http://albelakhari.blogspot.com/2010/06/blog-post_9158.html







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