भारतीय नारी भले ही पति का ख़ून पीती है
परन्तु पारम्परिक संस्कार के साथ जीती है
भले ही वह प्राणनाथ से दो दो हाथ करती है
पर अपमान भी बड़े सम्मान के साथ करती है
विनम्रता और समझदारी
उसकी रग रग में बहती है
पति को वह सीधे सीधे 'अबे गधे' नहीं,
बल्कि गुप्त भाषा में 'ए जी' कहती है
ग़ालिब साहिब ने फ़रमाया :
रगों में दौड़ने के हम नहीं कायल ग़ालिब
जो आँख ही से न टपके तो फिर लहू क्या है
किसी ने इसमें तड़का लगाया
घर में शान्ति से रहने के हम नहीं कायल भैया
जो सास ही को न पीटे तो फिर बहू क्या है .............
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