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Wednesday, September 1, 2010

अपमान भी बड़े सम्मान के साथ करती है

भारतीय नारी भले ही पति का ख़ून पीती है

परन्तु पारम्परिक संस्कार के साथ जीती है

भले ही वह प्राणनाथ से दो दो हाथ करती है

पर अपमान भी बड़े सम्मान के साथ करती है

विनम्रता और समझदारी

उसकी रग रग में बहती है

पति को वह सीधे सीधे 'अबे गधे' नहीं,

बल्कि गुप्त भाषा में ' जी' कहती है


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Wednesday, May 26, 2010

जो सास ही को न पीटे तो फिर बहू क्या है





ग़ालिब साहिब ने फ़रमाया :

रगों में दौड़ने के हम नहीं कायल ग़ालिब

जो आँख ही से टपके तो फिर लहू क्या है



किसी ने इसमें तड़का लगाया

घर में शान्ति से रहने के हम नहीं कायल भैया

जो सास ही को पीटे तो फिर बहू क्या है .............



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