एक बार फिर काव्य- यात्रा पर निकल रहा हूँ ।
शायद फिर कुछ ब्लोगर मित्रों से मुलाक़ात हो जाये ।
इस बार का टूर इस प्रकार है :
08 से 09 एप्रिल - मुम्बई
10 एप्रिल - राउरकेला
11 एप्रिल - सुबह कोलकाता
11 एप्रिल - शाम को लखनऊ
12 एप्रिल - लखनऊ
13 से 26 एप्रिल तक जयपुर
मेरा मोबाइल नंबर है :
094083 29393 / 092287 56902

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रंगलाल और उसका बेटा नंगलाल अपने इलाके के सबसे समझदार
लोग माने जाते हैं । इतने समझदार कि वन वे स्ट्रीट पर करते
वक्त भी दोनों तरफ देखते हैं ।
एक बार मुम्बई में रात के समय taxi वाले ने इनसे ज़्यादा पैसे
मांग लिए तो रंगलाल ने कहा - रूपये चाहे तुम दस-बीस और लेलो,
लेकिन पहले मेरा पर्स निकाल दो.... गाड़ी में कहीं गिर गया है और
मुझे अन्धेरे में दिखाई नहीं नहीं दे रहा है । उसमे मेरे बीस हज़ार
रूपये हैं..........जल्दी ढूंढ़ दो..........
ये सुनते ही taxi वाला taxi लेकर फरार होगया
दोनों फ़ोकट में घर पहुँच गये...........
रंगलाल का बेटा नंगलाल शादी करने को उतावला है लेकिन
नंगलाल उसे उपदेश दे रहा है कि शादी कोई अच्छी चीज़ नहीं है ।
इससे आदमी बर्बाद हो जाता है वगैरह वगैरह
नंगलाल भड़क जाता है और बाप से पूछता है - पापा ! जब शादी
इतनी ही बुरी चीज़ है तो आपने क्यों की ? और आपसे भी पहले
आपके बाप ने क्यों की ?
रंगलाल उदास स्वर में कहता है - इसलिए बेटा नंगलाल !
क्योंकि अक्ल बादाम खाने से नहीं, बल्कि ठोकर खाने से ही
आती है ....हा हा हा
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रंगलाल और उसका बेटा नंगलाल बड़े मनोयोग से महात्मा जी का
प्रवचन सुन रहे थे जो उनकी ही सोसायटी में हो रहा था और सैकड़ों
नर-नारी सत्संग का लाभ ले रहे थे । तभी महात्माजी बोले- जिन
जिन को स्वर्ग जाना है अपने हाथ खड़े कीजिये..........लगभग सभी
ने हाथ खड़े किये लेकिन रंगलाल-नंगलाल ने नहीं किये ।
महात्माजी ने पूछा - क्यों बच्चा ! आप स्वर्ग नहीं जाना चाहते ?
नंगलाल - स्वर्ग जा कर क्या करेंगे बाबा ! जब ये सब लोग स्वर्ग
चले जायेंगे तो हमारे लिए तो ये सोसायटी ही स्वर्ग हो जायेगी...

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रंगलाल का बेटा नंगलाल हुशियारी में अपने बाप का भी बाप है ।
उसे ज्ञान देना बड़ा मुश्किल है । लेकिन बाप कोशिश नहीं छोड़ता,
असफल प्रयास करता रहता है ।
अभी कल ही उसने माचिस की तीली जला कर पूछा - बताओ
नंगलाल ये आग कहाँ से आई ? नंगलाल की समझ में कुछ नहीं
आया तो उसने फूंक मार कर तीली बुझादी और बोला - पहले ये
बताओ की आग गई कहाँ ?
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