Sunday, December 13, 2009

गब्बर आएगा तब सो जाऊँगा ....



रंगलाल का बेटा नंगलाल सो नहीं रहा था

बाप ने डराते हुए कहा

- सोजा बेटा सोजा ! नहीं तो गब्बर जाएगा

बेटा भी कम नहीं था

बोला - आप चिन्ता करें....गब्बर आएगा तब सो जाऊँगा ....



Friday, December 11, 2009

कन्धे पे बिठालो, अभी चुप हो जाएगा




मैंने कहा ,

"गुड्डू की माँ !

ये गुड्डू हद कर रहा है.......

गधे पे बैठने की जिद कर रहा है ..."

वो बोली,

" तो क्या हो जाएगा,

कन्धे पे बिठालो,

अभी चुप हो जाएगा " हा हा हा हा .....





ढाबे में बैठे सभी लोग ज़ोरों से हँस पड़े



बहुत साल पहले की घटना है


मैं और मेरा एक दोस्त, हम दोनों देवी दर्शन की यात्रा पर थे

एक दिन चंडीगढ़ के आस पास राज मार्ग पर, ढाबे में चारपाई पर

बैठ कर खाना खा रहे थेमुझे पानी पीना था और कई बार मांग

चुका था लेकिन सर्विस करने वाला ध्यान ही नहीं दे रहा था..जब

मुझसे रहा गया तो मैं ज़ोर से चिल्लाया :


_ ओय ढाबे दा मालक कौन है ओय ?

_ मैं हैगां ...क्यों की गल ?

_ एत्थे आओ..तां दस्सां ...मैंने कहा

_ बोल लाले क्यों रोला पाया ? सेठ ने पूछा


मैंने कहा " कोई रोला नी पाया , तुस्सी एत्थे खड़े रह के मेरी प्लेट दा

ख्याल रक्खो ! मैं सामने नलके तों पानी पी के आन्दा हाँ ...

ढाबे में बैठे सभी लोग ज़ोरों से हँस पड़े..सेठ के साथ साथ उसका

स्टाफ भी हँसा......और असर ये हुआ कि सेठ पानी ख़ुद ले कर आया...


हा हा हा हा हा हा हा

Wednesday, December 9, 2009

रायपुर-भिलाई ब्लोगर्स पिकनिक के अन्दर की बात



31 नवम्बर की रात 3 बजे रायपुर में सम्पन्न छत्तीस गढ़

ब्लोगर्स मीटिंग में एक शानदार पिकनिक मनाने का

निर्णय लिया गया जिसमे केवल वही ब्लोगर्स शामिल हो

सकेंगे जिन्हें अपनी हर पोस्ट पर कम से कम तीन बेनामी

टिप्पणियां मिलती हैं और ब्लोग्वानी पर कम से कम

8 पसन्द



मीटिंग की सर्वाधिक गोपनीय बातें :


अनिल पुसदकर - बीअर, वोदका, व्हिस्की का इन्तेज़ाम मैं कर दूंगा..........

बी एस पाबला - लस्सी मैं ले आवांगा.............

शरद कोकस - रसमलाई मेरी तरफ़ से............

राजकुमार ग्वालानी - समोसे और कचौरियां मेरे जिम्मे.......

गगन शर्मा - फ्रूट सलाद मेरा.....

जी के अवधिया - बिसलेरी के कार्टून मैं ले आऊंगा

डॉ महेश सिन्हा - पेपर नेपकिन

संजीव तिवारी - हाजमोला मेरी तरफ़ से........

अनिल पुसदकर - आप चुप क्यों बैठे हो ललितजी ?

ललित शर्मा - चुप नई बैठ्या स्यूं ..सोच रह्या स्यूं के इतना अड़ंगा

खाने पीने के लिए गाँव से कितने लोग ले कै आऊं....

हा हा हा हा हा हा हा




Tuesday, December 8, 2009

35 किलो के समीर लाल 'समीर' उड़न तश्तरी वाले...



हमारे लाडले और लोकप्रिय

ब्लॉगर उड़न तश्तरी वाले समीरलाल 'समीर' जी का

पर्स
नाल्टा यानी वज़नदार

वैयक्तित्व आमतौर पर चर्चा में रहता है..........

नहीं रहता तो समीर जी ख़ुद ही कोई पोस्ट लगा कर

उसे चर्चित
कर देते हैं

यह भले ही उनकी ख़ुशमिज़ाजी

और स्वयं पर भी हँस लेने की विनम्र प्रकृति का द्योतक हो...

लेकिन मुझे
अच्छा नहीं लगता

क्योंकि वे शुरू में इतने मोटे नहीं थे

एक
समय तो ऐसा भी था

जब
उनका वज़न कुल 35 किलो था....

जब वे पैदा हुए थे....हा हा हा हा हा हा

Monday, December 7, 2009

एक कवि हृदय मच्छर का बेटा




एक कवि हृदय मच्छर का बेटा जब पहली बार उड़ान पर गया

और रात भर बाहर रहने के बाद सुबह लौटा

तो बाप ने पूछा

- कैसा रहा परफोर्मेंस ?



बेटा बोला - शानदार............

सभी लोग तालियाँ बजा बजा कर मेरा स्वागत कर रहे थे....हा हा हा हा


इन्दोर के तो केले वाले भी ताऊ रामपुरिया जैसे लट्ठ हैं ...




परसों इन्दोर के होटल अमर निवास में मैं और मेरे साथी गौरव शर्मा

राजीव शर्मा एक हास्य कार्यक्रम कर रहे थे

चिरंजीव रजत भंडारी और सौ.कां. स्वीटी के विवाह का समारोह था



अगले दिन यानी कल वहाँ से प्रस्थान करते समय मैंने

एक केले वाले से पूछा - केले क्या भाव दिए ?


वो बोला- बीस रूपये दर्जन............

मैंने कहा - कुछ कम करो भाई........

कमबख्त ने दो केले ही कम कर दिए..........हा हा हा हा हा हा


सच ! ताऊ के शहर में केले वाले भी कम लट्ठ नहीं हैं



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