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Sunday, February 3, 2013

ब्रह्मक्षत्रियों की कुलदेवी हिंगलाज के भजनों का वीडियो एल्बम जय माँ हिंगुलाज सूरत में रिलीज़

ब्रह्मक्षत्रियों की कुलदेवी हिंगलाज के भजनों का वीडियो एल्बम जय माँ हिंगुलाज सूरत में रिलीज़


हास्यकवि अलबेला खत्री की नवीनतम कृति जय माँ हिंगुलाज के शानदार लोकार्पण समारोह की झलकियाँ

हास्यकवि अलबेला खत्री की नवीनतम कृति जय माँ हिंगुलाज के शानदार लोकार्पण समारोह की झलकियाँ

हास्यकवि अलबेला खत्री की नवीनतम कृति जय माँ हिंगुलाज के शानदार लोकार्पण समारोह की झलकियाँ

Tuesday, July 5, 2011

कृपया नोट करें : यह पोस्ट केवल व्यभिचारियों के लिए आरक्षित है, सदाचारी लोग इसे न पढ़ें





"परधन पत्थर जानिए, पर तिरिया मातु समान"

यह पंक्ति हास्यकवि अलबेला खत्री की नहीं दुराचारी बन्धुओ !

गोस्वामी तुलसीदास जी की है और उन्होंने आप जैसे व्यभिचारियों के

लिए ही यह रचना की थीलिहाज़ा इस पंक्ति का मान रखें और परस्त्री

को पटा-पटू कर उसके साथ दैहिक सम्बन्ध बनाने से बचें


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Friday, July 1, 2011

जब रिश्वत में तीन वरदान देवता ख़ुद दे रहे हैं तो भारत से भ्रष्टाचार कौन मिटा सकता है ?





यमराज
के एजेन्ट रंगलाल को लेने आये थे लेकिन मिलते -जुलते

नाम की वजह से भूलवश अपने साथ नंगलाल को ले गयेऊपर जा कर

पता
लगा कि ये तो गलत आदमी गया


यमराज - जाओ भाई जाओ, वापिस जाओ


नंगलाल - ऐसे कैसे जाओ ? और

कहाँ जाओ ? क्यूँ जाओ ? इतनी मुश्किल से तो आया हूँ...........


यमराज - देखो प्यारे, तुम गलती से

गये हो, यहाँ तुम्हारी कोई ज़रूरत नहीं है


नंगलाल - ज़रूरत तो वहां भी नहीं सरजी ! अपन तो यहीं रहेंगे

...
और अगर भेजना ही है तो फिर मेरे

साथ ढंग से बात करो..और तीन

वरदान दो, क्योंकि मैं जानता हूँ देवताओं से कोई चूक होजाती है तो वे

सामने वाले का मुँह बन्द करने के लिए उसे वरदान देते हैं


यमराज - मांग लाले मांग ! क्या चाहिए.........


नंगलाल - पहला वरदान : मुझे इतना धन मिल जाये कि मेरी सौ पीढियां भी उडाये तो कम पड़े...


यमराज - डन !


नंगलाल - दूसरा वरदान : मेरे माँ बाप फिर जवान हो जाएँ और उन्हें कभी कोई तकलीफ़ हो


यमराज - ये भी डन !


नंगलाल - मेरा काम होगया, माँ बाप का भी हो गया । अब तीसरा वरदान ऐसा दो बोस ! कि हिन्दुस्तान से भ्रष्टाचार बिलकुल ख़त्म हो जाये ।


अब के यमराज को बहुत गुस्सा आया । बहुत बोले तो बहुत गुस्सा आया लेकिन वो कुछ बोले नहीं । परन्तु उनके भैंसे से बर्दाश्त नहीं हुआ । उसने एक टक्कर मारी और बोला - हरामखोर आदमी.........जब रिश्वत में तीन वरदान देवता ख़ुद दे रहे हैं तो भारत से भ्रष्टाचार कौन मिटा सकता है ?

तकनीकी दुविधा के कारण ये पोस्ट ढंग से सैट नहीं हो सकी...क्षमा चाहता हूँ ..लेकिन देने को वरदान एक भी नहीं ...हा हा हा हा


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Wednesday, June 22, 2011

पापा कुछ तो इन्साफ कीजिये..............





रंगलाल
ने नंगलाल से कहा - बेटा नंगलाल !

रात बहुत हो गई है ...बत्ती बुझादे


नंगलाल - आप आंखें बन्द कर लो और बत्ती बुझ गई है

ऐसा समझ लो


रंगलाल - ठीक है, ये मेरा चश्मा वहां रख दे....


नंगलाल - चश्मा उतारो मत पापा, सोते समय चश्मा लगायेंगे

तो सपने साफ नज़र आयेंगे


रंगलाल - ठीक है बेटा ! पर अलार्म तो लगा दे.........

नंगलाल - पापा कुछ तो इन्साफ कीजिये,

दो बड़े बड़े काम मैंने किये हैं,

ये छोटा सा एक काम तो आप कीजिये

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Wednesday, June 8, 2011

वैकुण्ठ में मोहन और मीरा दोनों हँस रहे होंगे




वो
ज़माना और था जब मीरा मोहन ...मोहन ...पुकारती रही ....और

लोग
उसका विरोध करते रहे.... वो मीरा मोहन ......मोहन........ गाते

हुए
स्वयं मोहन हो गई ....लेकिन मोहन के साथ ......उसका सम्बन्ध

केवल
आत्मिक रहा , दैहिक नहीं । अब ज़माना और है .....अब तो

मीरा
लोकसभा की अध्यक्ष है भाई.......अब तो मनमोहन को भी

कुछ
बोलना होगा तो वे उन्हें ......'आदरणीय अध्यक्ष महोदय ' ही

कह
कर बुलाएँगे


जियो ..जियो ..आज तो वैकुण्ठ में मोहन और मीरा दोनों हँस रहे

होंगे
और रुक्मणीजी दोनों को हँसते देख वैसे ही जल रही होगी

जैसे
यहाँ माया जी जल रही हैं .........हा हा हा हा हा हा हा हा


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Tuesday, June 7, 2011

जूता जब बोलता है तो ख़ूब बोलता है.........सुनिए, क्या कहता है ?






माहौल बहुत गर्म था। गर्म क्या था, उबल रहा था। वक्ताओं द्वारा लगातार

असंसदीय भाषा का प्रयोग करने से सदन में संसद जैसा दृश्य
उपस्थित

हो चुका था। सभी को बोलने की पड़ी थी, सुनने को कोई राजी नहीं
था।

गाली-गलौज तक पहुंच चुकी बहस किसी भी क्षण हाथा-पाई में भी
तब्दील

हो सकती थी। तभी अध्यक्ष महोदय अपनी सीट पर खड़े हो गए
और माइक

को अपने मुंह में लगभग ठूंसते हुए बोले, 'देखिए.. मैं अन्तिम
चेतावनी

यानी लास्ट वार्निंग दे रहा हूं कि सब शान्त हो जाएं क्योंकि हम लोग
यहां

शोकसभा करने के लिए जमा हुए हैं, मेहरबानी करके इसे
लोकसभा

बनाइए। प्लीज..अनुशासन रखिए और यदि नहीं रख सकते
तो

भाड़ में जाओ, मैं सभा को यहीं समाप्त कर देता हूं।



अगले ही पल
सब

शान्त हो चुके थे। मानो सभी की लपर-लपर चल रही .जुबानों
को

एक साथ लकवा मार गया हो। अवसर था अखिल भारतीय जूता
महासंघ

के गठन का जिसकी पहली आम बैठक में भाग लेने हज़ारों जूते-
जूतियां

एकत्र हुए थे।



एक सुन्दर और आकर्षक नवजूती ने खड़े होकर माइक संभाला,

'आदरणीय अध्यक्ष महोदय, मंच पर विराजमान विदेशी कंपनियों के

सेलिब्रिटी अर्थात्महंगे जूते-जूतियों और सदन में उपस्थित नए-पुराने,

छोटे-बड़े, मेल-फीमेल स्वजनों.. मेरे मन में आज वैधव्य का दुःख तो

बहुत है, लेकिन ये कहते हुए गर्व भी बहुत हो रहा है कि मेरे पति तीन साल

तक लगातार अपने देश-समाज और स्वामी की सेवा करते हुए अन्ततः

शहीद हो गए। उनका साइज भले ही सात था लेकिन मजबूत इतने थे कि

दस नंबरी भी शरमा जाएं।



सज्जनो, जिस दिन उनका निर्माण हुआ, उसके अगले ही दिन एक बहादुर

फौजी के पांवों ने उन्हें अपना लिया। भारतीय सेना का वो शूरवीर सिपाही

लद्दाख और सियाचीन जैसी बर्फ़ीली जगहों पर तैनात रह कर जब तक

अपनी सीमाओं की रक्षा करता रहा तब तक मेरे पति ने जी जान से उनके

पांवों की रक्षा की। गला कर बल्कि सड़ा कर रख देने वाली बर्फ़ीली

चट्टानों और भीतर तक चीर देने वाली तेज़-तीखी शीत समीर से

जूझते हुए वे स्वयं गल गए, गल-गल कर खत्म हो गए परन्तु अपनी

आख़री सांस तक अपने स्वामी के पांवों को ठंडा नहीं होने दिया। मुझे

अभिमान है उनकी क़ुर्बानी पर और मैं कामना करती हूं कि हर जनम

में मुझे पति के रूप में वही मिले चाहे हर बार मुझे भरी जवानी में ही

विधवा क्यूं होना पड़े, इतना कह कर वह जूती सुबकने लगी।

पूरा सदन तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। किसी ने नारा लगाया,

जब तक सूरज चान्द रहेंगे, जूते जिन्दाबाद रहेंगे।



एक अन्य मंचासीन जूता बोला, 'भाइयो और बहनो, आदिकाल से लेकर

आज तक, मानव और जूतों का गहरा सम्बन्ध रहा है। हमने सदा

मानव की सेवा की है और बदले में मानव ने भी हमारा बहुत ख्याल

रखा है, अपने हाथों से हमें पॉलिश किया है, कपड़ा मार-मार कर

चमकाया है यहां तक कि मन्दिर में भी जाता है तो भगवान से ज्य़ादा

हमारा ध्यान रखता है कि कोई हमें चुरा ले, उठा ले। मित्रो, त्रेतायुग

में तो हमारे पूज्य पूर्वज खड़ाउओं ने अयोध्या के सिंहासन पर बैठकर

शासन भी किया है। लेकिन आज हमारी अस्मिता संकट में है।

हम मानवोपकार के लिए सदा अपना जीवन अर्पित करते आए हैं, लेकिन

आज घृणित राजनीति में घसीटे जा रहे हैं और सम्मान के बजाय उपहास

का पात्र बनते जा रहे हैं। कभी कोई असामाजिक तत्व हमारी माला बनाकर

महापुरुषों की प्रतिमा पर चढ़ा देता है तो कभी कोई हमारे तलों में हेरोइन

या ब्राउन शुगर छिपा कर तस्करी कर लेता है। आजकल तो हम हथियार

की तरह इस्तेमाल होने लगे हैं, जब और जिसके मन में आए, कोई भी

हमें किसी नेता पर फेंककर ख़ुद हीरो बन जाता है और हमारे कारण

दो दो वरिष्ठ नेताओं की राजनीतिक हत्या हो जाती है बेचारे सज्जन लोग

टिकट से ही वंचित हो जाते हैं। इतिहास साक्षी है, हम अहिंसावादी हैं।

हम अस्त्र हैं, शस्त्र हैं लेकिन ये हमारी प्रतिभा है कि अवसर पड़े तो

हम दोनों तरह से काम सकते हैं। हमारी इसी योग्यता का लोगों ने

मिसयूज किया है। हमें......शोषण और अत्याचार के विरूद्ध

आवाज़ उठानी होगी।



हां, हां, उठानी होगी, सबने एक स्वर में कहा


इसी तरह और भी अनेक मुद्दे हैं जिनपर हमें एकजुट होकर काम

करना पड़ेगा और अपने हक के लिए संगठित होकर संघर्ष करना

पड़ेगा। जय जूता, जय जूता महासंघ।



सदन में तालियों के साथ नारे भी गूंज उठे

- जूतों तुम आगे बढ़ो जूतियां तुम्हारे साथ है,

हिंसा से अछूते हैं - हम भारत के जूते हैं....इंकलाब-जिन्दाबाद


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Monday, June 6, 2011

एक फूंक भर हवा थी जिसे तूने आंधी बना दिया...... एक साधारण से महात्मा को गांधी बना दिया





वाह री मेरे देश की दिल्ली सरकार !

रात ही रात में कर दिया चमत्कार ?


एक फूंक भर हवा थी जिसे तूने आंधी बना दिया

एक साधारण से महात्मा को गांधी बना दिया



अब ये आंधी

अर्थात गांधी



तेरी चूलें हिला देगा


मिट्टी में मिला देगा तेरे तमाम इन्तेज़ाम को


चूँकि उम्मीदें बहुत जगी हैं इससे अवाम को



इसलिए अवाम का हाथ अब इसके साथ होगा


और तेरे पंजे में अब केवल तेरा ही हाथ होगा



देखना तमाशा, आगे आगे होता है क्या


ये तो इब्तिदा है गालिबन रोता है क्या



तूने उसकी एक रात भारी की है ?

नहीं !

नहीं !!

नहीं !!!

तूने अपनी मर्ग की तैयारी की है



तूने जो दी है मासूमों को सज़ा


वो पलटेगी बन कर के कज़ा


तमाशबीनों को मज़ा ही मज़ा



ख़ुदा खैर करे डार्लिंग............


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Wednesday, May 4, 2011

नशा है या मौत का सामान, कर दो सभी को सावधान




गुटखा ये पाउच वाला, जिसने भी मुंह में डाला

गुटखा ले लेगा उसकी जान

कर दो सभी को सावधान.......................


कितने ही मर गए इससे,कितने ही मिट गए इससे

बूढे बालक नौजवान

कर दो सभी को सावधान ...............................


संतूर तुलसी शिमला गोवा दरबार कोई

मानिकचंद मूलचंद हो या अनुराग कोई

हो चाहे रजनीगंधा पानपराग कोई

सबके सब हैं ज़हरीले

कत्थई भूरे या पीले

सब के सब हैं एक समान

करदो सभी को सावधान ............................



सडियल सुपारी डाली,
सस्ता ज़र्दा मिलाया

लौंग इलायची खुश्बू ठंडक किवाम दिखलाया

बाकी बस खड़िया मिटटी, कत्था चूना लगाया

चमड़ी छिपकलियों वाली

साँपों की हड्डियाँ डाली

नशा है या मौत का सामान

कर दो सभी को सावधान ................................



तिल्ली को खा जाता है पथरी अल्सर देता है

किडनी का दुश्मन है ये कैंसर भी कर देता है

खाने वाले का जीवन बर्बाद कर देता है

सबसे गन्दी बीमारी

चालू रहती पिचकारी

दफ्तर हो घर हो या दुकान

कर दो सभी को सावधान ...............................


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Tuesday, May 3, 2011

दाउद की माँ भी कब तक खैर मनाएगी......




वीरप्पन निपट गया

प्रभाकरन निपट गया

फूलन निपट गई

लादेन भी निपट गया


अब दाउद की माँ भी कब तक खैर मनाएगी ?

आएगी आएगी..यमराज को इसकी याद भी आएगी


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Tuesday, April 26, 2011

एक पैरोडी छोटी सी...............

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मुन्नी
बदनाम है

शीला जवान है

फिर भी बुड्ढे अन्ना के पीछे

पूरा हिन्दोस्तान है

Wednesday, March 2, 2011

बम बम महादेव हर हर महादेव




बम बम महादेव हर हर महादेव
बम बम महादेव हर हर महादेव


सभी को महाशिवरात्रि की पावन बेला पर हार्दिक बधाई !




Monday, November 29, 2010

मैं आपको एक राज़ की बात बता रहा हूँ , प्लीज़ आप किसी को बताना मत......


जो बात कोई नहीं जानता वो मैं जानता हूँ,

राज़ की बात है लेकिन आज मन में लहर गई

इसलिए आपको बता रहा हूँ

प्लीज़ आप किसी को मत बताना -


"फोटोग्राफ़र वही आदमी बनता है

जिसे बचपन से ही

पराये घरों में झाँकने की आदत होती है .."

हा हा हा हा


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Tuesday, November 16, 2010

हम सब चोर हैं ???????





पोस्टर वाला भी गज़ब ढा गया

संसद भवन के मुख्य द्वार पर

हम सब चोर हैं

फ़िल्म का पोस्टर चिपका गया


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Monday, November 1, 2010

जिसने फ़रिश्तों को भी पतित कर दिया


महत्वाकांक्षा वह पाप है

जिसने फ़रिश्तों को भी पतित कर दिया

- शेक्सपियर

Thursday, October 21, 2010

डॉ माणिक मृगेश की रंगारंग महफ़िल का मज़ा लेना है तो कल चलो बड़ौदा




कल अर्थात 22 अक्टूबर 2010 की शाम देश के कई बड़े बड़े कवि

और कवयित्री गुजरात की सांस्कृतिक राजधानी बड़ौदा में

इन्डियन ऑयल द्वारा आयोजित कवि-सम्मेलन में

काव्य -प्रस्तुति देंगे ।


देश के जाने -माने हास्य-व्यंग्यकार,

कवि और कवि-सम्मेलनों के संयोजक -संचालक डॉ माणिक मृगेश

के रससिक्त संचालन में काव्य-पाठ करने कल मैं भी

बड़ौदा जा रहा हूँ ।


आप चल रहे हैं क्या आनन्द लेने ?


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Saturday, September 4, 2010

अन्तर्मुखता ही सच्चे शिक्षण की शुरूआत है -स्वामी रामतीर्थ




वास्तविक शिक्षा का आदर्श यह है

कि
हम अन्दर से कितनी विद्या

निकाल सकते हैं,

यह
नहीं कि बाहर से कितनी अन्दर डाल चुके हैं

-स्वामी रामतीर्थ


उन विषयों का पढ़ना

जो
हमारे जीवन में कभी काम नहीं आते,

शिक्षा नहीं है

-स्वामी रामतीर्थ


अन्तर्मुखता ही सच्चे शिक्षण की शुरूआत है

-स्वामी रामतीर्थ


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