Showing posts with label तिरुवल्लुवर. Show all posts
Showing posts with label तिरुवल्लुवर. Show all posts

Tuesday, June 8, 2010

जिसके कारण मैं इसकी कुछ परवाह नहीं करता...........




बहाद्दुर आदमी

जिन दिनों अपने जिस्म पर गहरे घाव नहीं खाता,

वह समझता है कि वे दिन व्यर्थ नष्ट हो गये.........


- तिरुवल्लुवर



मैं पानी के भीषण प्रवाह की तरह अत्यन्त भयंकर अवसरों पर भी

आगे ही बढ़ता हूँमानो मेरे लिए इस जान के अलावा

कोई और जान भी है जिसके कारण मैं इसकी कुछ परवाह नहीं करता

या मुझे इस जान के साथ दुश्मनी है


- मुतनब्बी





Labels

Followers

Powered By Blogger

Blog Archive