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Sunday, October 25, 2009

आज उसी की जेब से पौव्वा निकला

छोटी सी बात का बड़ा हौव्वा निकला

हंस जिसे समझे थे वो कौव्वा निकला

रोज़ हमको देता था नसीहत पीने की

आज उसी की जेब से पौव्वा निकला

________________हा हा हा हा हा हा
____________________________________________

यह मुक्तक

एक
ट्रक के पीछे लिखे वाक्य से

प्रेरित
होकर लिखा

इसलिए
अपना मौलिक नहीं,

थोड़ा
थोड़ा चोरी का माल भी शामिल है

...
हा हा हा हा

Wednesday, October 21, 2009

राधा-कृष्ण सी जोड़ी या रोज़ की माथा फोड़ी...

पति हो काला


और


पत्नी हो गोरी


__तो लगे राधा-कृष्ण सी जोड़ी



लेकिन


पति हो गोरा


और पत्नी हो काली


__तो रोज़ की माथा फोड़ी ....हा हा हा

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