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Tuesday, March 19, 2013

कर्मभूमि गुजरात को एक विनम्र प्रणाम है वीडियो एल्बम हमारा गुजरात

श्रीगंगानगर राजस्थान में जन्मे 

हास्यकवि अलबेला खत्री का 

अपनी कर्मभूमि  गुजरात को  एक विनम्र प्रणाम है  

वीडियो एल्बम हमारा गुजरात 



Thursday, March 14, 2013

मसीहा मानवता का - the real hero of society आपके आदेश पर एक बार फिर


प्रिय पाठकों व मित्रों  के आदेश  पर गुजरात के लोकप्रिय मुख्यमंत्री 

नरेन्द्र मोदी  पर रचित कविता : मसीहा  मानवता का - the real hero 

of society  एक बार फिर प्रकाशित कर रहा हूँ . 



Tuesday, March 12, 2013

शौर्य और पराक्रम के प्रतीक पुरूष, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी से एक लम्बी भेंट



प्यारे मित्रो नमस्कार

गाँधी नगर में मेरा कल का दिन बहुत ऊर्जा  और प्रफुल्लता भरा रहा .  


अहमदाबाद  के बंधुवर  राजकुमार भक्कड़ के सौजन्य से  अनेकानेक  

दिग्गज  हस्तियों से  मुलाकात का सिलसिला  दिन भर चला . विशेषकर 

ऊर्जा, शौर्य  और पराक्रम के प्रतीक पुरूष, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री नरेन्द्र

 भाई मोदी से एक लम्बी भेंट हुई तथा उन पर रचित एक लम्बी कविता 

उन्हीं के कार्यालय में सुनाने व भेंट करने का अवसर मिला .


मोदीजी ने बड़े आनंद से पूरी रचना का श्रवण करने के बाद जो टिप्पणी की 


वो उनकी आत्मिक विनम्रता की सुगंध थी ...........उनकी  शुभ कामनाओं  

की महक  मुझे बहुत दिनों  तक  आह्लादित रखेगी

जय हिन्द ! 




Saturday, February 16, 2013

जूतियों से न मरे तो मारो पत्थरों से किन्तु फांसी वाला फंदा बदनाम मत कीजिये


फांसी वाले फंदे सिर्फ़ मानवों को शोभते हैं,

दानवों को देकर हराम मत कीजिये



रो पड़ेंगी रूहें राजगुरू संग भगत की,


सुखदेव सिसके वो काम मत कीजिये



दामिनी के हत्यारों को मारो जूतियों से आप,


जब तक न मरें आराम मत कीजिये



जूतियों से न मरे तो मारो पत्थरों से किन्तु


फांसी वाला फंदा बदनाम मत कीजिये



जय हिन्द !


-अलबेला खत्री

Monday, November 12, 2012

गब्बर भी अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझता, नरेन्द्र मोदी भी किसी को कुछ नहीं समझते




गुजरात के स्वनामधन्य  माननीय मुख्यमंत्री  श्री नरेन्द्र मोदी को  बन्दर कहने वाले


महानुभावों से मेरी विनती है कि  वे अपनी भाषा सुधारें .  बन्दर  कहना उचित नहीं है .


 बेचारे बन्दर ने आपका क्या बिगाड़ा है जो आप उसे इस राजनीति  की  कीचड़ में


घसीट रहे हैं .  हाँ, कहना  है  तो गब्बर  कहो ...गब्बर सिंह कहो ....और इसलिए


कहो क्योंकि ये  संबोधन उससे ज्यादा मुफीद है .



उदाहरणार्थ :


गब्बर के ताप से सिर्फ एक ही आदमी बचा सकता है  खुद गब्बर

नरेन्द्र मोदी के  ताप से भी सिर्फ एक ही आदमी बचा सकता है खुद  नरेन्द्र मोदी


गब्बर के पास साम्भा है प्रचार के लिए  जो पहाड़ पर बैठ कर उसके भाव बताता है

नरेन्द्र मोदी  ने पूरे  सिस्टम को ही साम्भा बना कर, जगह जगह होर्डिंग पर लटका दिया है अपनी फोटो के साथ


गब्बर जब रामगढ़ समेत किसी भी गाँव में जाता है तो गरीब लोग अपना काम काज छोड़ कर डर  के मारे भाग जाते हैं

नरेन्द्र मोदी जब कभी किसी शहर में जाते हैं तो  सड़कों पर से गरीब लारी वालों और छोटे छोटे धंधे करके पेट पालने वालों को खदेड़  कर भगा दिया जाता है


गब्बर के भी सामने सब लोग डरते हैं और पीठ पीछे उसकी बुराई करते हैं

नरेन्द्र मोदी  के भी सामने बोलने की  ताकत किसी में नहीं, लेकिन पीठ पीछे .....कहने की ज़रूरत ही क्या है,
सब जानते हैं



गब्बर भी अपने  विरुद्ध शिकंजा कसने वाले ठाकुर के हाथ काट डालता है और उसके परिवार को काल के गाल में धकेल देता  है

नरेन्द्र मोदी  भी अपने विरोधियों की बोलती बंद करने के लिए  सुविख्यात हैं


गब्बर  भी आखिर  में बहुत तकलीफ पाता है और अपने कर्मों की सजा पाता है

नरेन्द्र मोदी भी जिस दिन  सत्ता में न रहे, उस दिन .....हालत पतली होने वाली है ...इन्हें भी जवाब देना पड़ेगा उस हर सवाल का जो अभी  दबे पड़े हैं


गब्बर को भी बसंती का नाचगान भाता है

नरेन्द्र मोदी को भी उत्सवधर्मी  कहा जाता है


गब्बर के  आदमी भी लोगों से अनाज दाना आदि लेते हैं तो कोई ज़ुल्म नहीं करते 

नरेन्द्र मोदी के पट्ठे भी लोगों से लक्ष्मी  लेते हैं तो कोई अपराध नहीं करते


गब्बर भी अपने सामने किसी को कुछ नहीं समझता

नरेन्द्र मोदी  भी किसी को कुछ नहीं  समझते


__और भी बहुत सी समानताएं हैं, लेकिन समयाभाव में अभी इतना ही 


जय हिन्द !
जय जय गरवी गुजरात

-अलबेला खत्री

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