नंगलाल आज बड़े अच्छे मूड में था । ज्ञान की बातें कर रहा था । जैसे
नियमित रूप से समीरलालजी, कभी कभी राज भाटिया जी और
भूले - चूके से रूपचंद्र शास्त्री जी कर लेते हैं । उसके पिताश्री रंगलाल ने
मौका देख कर सवाल कर दिया - बेटा नंगू ! ये बताओ कि हमारे देश में
एक पत्नी के होते हुए आदमी दूसरी शादी क्यों नहीं कर सकता ।
नंगलाल - ये तो गधा भी बता देगा पापा कि जो आदमी अपनी रक्षा
स्वयं नहीं कर सकता उसकी रक्षा देश का कानून करता है

महत्वाकांक्षा वह पाप है
जिसने फ़रिश्तों को भी पतित कर दिया
- शेक्सपियर
अभी तीन दिन पहले अहमदाबाद में बहुत बड़ा कवि सम्मेलन
था दी गुजरात एस्टेट डेवलेपर्स एसोसिएशन यानी सरल शब्दों
में बिल्डर्स एसोसिएशन का जिसमे देश भर के ख्यातनाम कवि-
कवयित्रियों ने काव्यपाठ किया । उस भव्य कवि-सम्मेलन का मंच
सञ्चालन किया था दिल्ली के गजेन्द्र सोलंकी ने ।
चूँकि मैं कद-काठी में ठीक-ठाक हूँ इसलिए मुझे प्रस्तुत करते हुए
गजेन्द्र सोलंकी ने यह कह कर बुलाया कि ये देश का सबसे लम्बा
कवि है जो खड़ा हो कर देखे तो संतरे भी निम्बू दिखाई देते हैं........
इस चुटकी पर लोगों ने ख़ूब ठहाका लगाया । लेकिन अपन तो ठहरे
अपन !
मैंने खड़े होते ही कहा कि भाई मैं तो बिलकुल भी लम्बा नहीं हूँ,
लम्बे तो थे मेरे पूज्य पिताजी, जो एक बार जैसलमेर गये और
लोगों से कहा कि भाई मुझे ऊंट दिखाओ, ऊंट देखना है । उनकी बात
सुन कर लोगों ने पिताजी को नीचे से ऊपर देखा और कहा कि साहब
आप क्यों तकलीफ़ करते हैं ? हम ऊंट को ले आते हैं, वो आप को
देख लेगा ...हा हा हा हा हा हा हा हा
इस बात पर हमारे संयोजक राजकुमार भक्कड़ ने तो ठहाका
लगाया ही उनके पिताश्री नारायणदास भक्कड़ भी अपनी हँसी
नहीं रोक पाए ।
रंगलाल ने पूछा
बोल बेटा नंगलाल !
दिल्ली के राष्ट्र मण्डल खेलों की तैयारी में
किस किस ने कितना माल कमाया ?
नंगलाल ने मुँह खोला
और
मुस्कुराते हुए बोला
पापा !
मुझे ये तो नहीं पता
कि किसने कितना खाया
लेकिन चिल्ला वही रहे हैं
जिनके हिस्से में नहीं आया