Tuesday, February 23, 2010

नंगलाल की वाट लग गई............




रंगलाल का बेटा नंगलाल स्कूल से घर आ रहा था । अचानक रास्ते

में ज़ोर से बरसात आ गई जिस कारण वह भीगता-भागता ही

सड़क पर चल रहा था कि अचानक पाँव फिसलने से कीचड़ में गिर

गया तभी आकाश में ज़ोरदार बिजली चमकी।


नंगलाल ने ख़ुद की हालत देखी और फिर आकाश की तरफ मुँह

करके बोला - वाह भगवान् ! पहले कीचड़ में गिरा दिया फिर

फोटो भी खींच ली ..........















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Monday, February 22, 2010

कवि सम्मेलनीय बातों में से बात और बात बात में बात ...........

हास्यकवि अलबेला खत्री इन लातूर

हिन्दी कवि-सम्मेलनों का नया आकर्षण रुचिप्रिया भारतीय




हिन्दी कवि-सम्मेलनों का नया आकर्षण

एक शानदार और जानदार कवयित्री

रही है अपनी धुंआधार प्रस्तुति ले कर....

जिसका नाम है

रुचिप्रिया भारतीय




































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Wednesday, February 17, 2010

बोलो नारीवादियो ! क्या बुराई है इस फोटो में ?


















क्या यह फोटो


अश्लील है ?


बेहूदा है ?


भौंडा है ?


गन्दा है ?


नग्न है ?


फटा हुआ है ?


गीला है ?


अवयस्क है ?


सुगर का मरीज़ है ?


हार्ट पेशेंट है ?


_________क्या तकलीफ है इस फोटो से ?



नारी ब्लॉग वालो !


नारीवादियो !


बोलो क्या बुराई है इस फोटो में ?


क्यों फ़ोकट में मेरी टी आर पी बढा रहे हो


मेरी निन्दा कर कर के ?


आपका भी शुभेच्छु


-अलबेला खत्री




Tuesday, February 16, 2010

ये है एक कलाकार का दर्द.......कोई समझेगा ?



आज
बड़ा ख़ास दिन था मेरे लिए भी, मेरे बड़े भाई के लिए भी
और मेरे परिवार के लिए भी...........क्योंकि आज इस कवि-
सम्मेलनीय श्रंखला का आखरी प्रोग्राम करके मुझे घर जाना
था मेरा बेटा बीमार है और लगातार मुझे याद कर रहा है, आज
ही मेरे बड़े भाई साहेब की बाई पास सर्जरी हुई है जिससे पूरे
परिवार की सांसें थमी हुई हैं


मैं आज दिन भर श्री सुखमनी साहेब का पाठ करना चाहता था
पर नहीं कर सकाक्योंकि समय नहीं मिला, भाईजी की
सर्जरी सफलता पूर्वक सम्पन्न हो चुकी है और घर के सब लोग
उनके होश में आने की बाट जोह रहे हैं, ऐसे में मुझे मेरी माँ के
पास होना चाहिए था .........लेकिन नहीं हूँ क्योंकि जिन लोगों ने
मुझे लेकर शो आयोजित किया था उन्होंने मुझे साफ़ कह दिया
कि अगर आप नहीं रहोगे, तो हमारा प्रोग्राम फ्लॉप हो जायेगा ........


क्या करता मैं ? झख मार कर मुझे लोगों को हँसाना पड़ा..........
भले ही माँ की आँखों से आँसू बह रहे थे......और उन्हें ढाढस देने के
लिए केवल बांसुरी वाला ही घर में था ..बाकी सब तो अस्पताल
में थे...........

खैर ...भतीजे का फोन गया है कि भाई साहेब की सर्जरी हो
चुकी है और वे अभी ICU में शिफ्ट कर दिये गये हैंकल मुझे
एक फ़िल्म साइन करने के लिए मुम्बई में रहना है, कल ही
सूरत में अपने बच्चे को डॉक्टर के पास ले जाना है और कल ही
जयपुर में भाई साहेब को देखना और माँ से मिलना है लेकिन
मैं इनमे से एक भी काम नहीं कर पाऊंगा क्योंकि 20 फरवरी
को होने वाले एक बड़े इवेन्ट के लिए मुझे आज रात ही दो
कव्वालियाँ और पूरी स्क्रिप्ट लिख कर देनी हैयदि ये काम नहीं
किया तो मार्केट में नाम खराब हो जाएगा और नाम खराब होने पर
कितना नुक्सान होता है इसका मुझे पूरा अनुभव एक बार हो
चुका है,,,,,,,,,,,लिहाज़ा अब मैं बैठ रहा हूँ लिखने के लिए............
इतना समय भी मेरे पास नहीं है कि आधा घंटा प्रभु का ध्यान
करके अपने अग्रज के स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना कर सकूँ...........


ये दर्द है एक कलाकार का ....उस कलाकार का जिसने कभी रोना
और रुलाना सीखा ही नहीं...बस हँसना और हँसाना ही सीखा है
लेकिन आज चूँकि मेरा स्वास्थ्य भी बहुत खराब है इसलिए एक
गड़बड़ हो गई कि मेरी भी हिम्मत जवाब दे गई और एक बार फिर
मैंने सिगरेट सुलगाली.................. बड़ी मुश्किल से छूटी थी.....
पता नहीं अब वापिस कब छोड़ पाऊंगा.........


क़मर जलालाबादी का शे' याद आता है -

खुशियाँ मिलीं तो उनको ज़माने में बाँट दी
और ग़म मिला तो अपने ही घर ले के गया

लेकिन मैं छोटा आदमी हूँ, मैंने तो आज मेरा दर्द भी आपसे बाँट दिया
















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Friday, February 5, 2010

नंगलाल का जवाब नहीं...........




रंगलाल के बेटे नंगलाल को डांटते हुए स्कूल मास्टर ने कहा -

तुम्हें शर्म आनी चाहिए ! तीन साल से एक ही क्लास में पड़े

हुए हो.........


इस में शर्म की क्या बात है सर ? नंगलाल बोला - और अगर

है, तो आपको भी आनी चाहिए.......क्योंकि आप भी तो पिछले

दस सालों से इसी एक क्लास में टिके हुए हो..............





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Thursday, February 4, 2010

हास्यकवि अलबेला खत्री ने खरगोन में खूब रंग जमाया

चर्चा है भाई चर्चा है ...चर्चा है भाई चर्चा है



दाल है थोड़ी , मर्चा ज़्यादा


आय ज़रा सी खर्चा ज़्यादा


यकीं हो तो देखलो ख़ुद ही


चिट्ठे कम हैं, चर्चा ज़्यादा





Tuesday, February 2, 2010

नया अर्थ



तमसो मा ज्योतिर्गमय

का नया अर्थ

तुम सो जाओ माँ ! मैं ज्योति के पास जा रहा हूँ



Monday, February 1, 2010

पापा, आपकी शादी हो गई ?


एक बहुत ही पुराना बाबा आदम के ज़माने का लतीफ़ा याद

रहा हैरंगलाल का बेटा नंगलाल अपने बाप से बतिया रहा था


नंगलाल - पापा, आपकी शादी हो गई ?

रंगलाल - हाँ बेटा ! हो गई ?

नंगलाल - किस से हुई ?

रंगलाल - ये बैठी तुम्हारी माँ, इससे हुई........

नंगलाल - क्या पापा ! आप भी हद करते हो..घर की घर में ही...............



आज से अपन ने भी चर्चा का खर्चा उठाना शुरू कर दिया



प्यारे
मित्रो !

चूँकि अभी तक मेरा चिट्ठाचर्चा वाला ब्लॉग ब्लोगवाणी पर

दिखना शुरू नहीं हुआ है इसलिए आपको सूचना देने हेतु ये पोस्ट

यहाँ टिकाई है कि आज से अपन ने भी चर्चा का खर्चा उठाना शुरू

कर दिया है अगर आपके पास थोड़ा समय हो, तो एक बार

यहाँ भी झांक लीजियेगा


आपकी जेब से कुछ जाएगा नहीं लेकिन मुझे मज़ा जाएगा

क्योंकि आप टिप्पणियां भी तो करेंगे ....हा हा हा हा


दर्शनीय स्थल यहाँ है

http://albelakhatrischitthacharcha.blogspot.com/

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