Showing posts with label भूकम्प. Show all posts
Showing posts with label भूकम्प. Show all posts

Saturday, September 18, 2010

हमारे लोकतन्त्र की तरह भ्रष्ट हो गया है





पहले भी फटते थे बादल

लेकिन रोज़ नहीं, कभी-कभार


पहले भी गिरती थी बिजलियाँ

परन्तु साल में एक-दो बार


आते थे भूकम्प और भूचाल भी

मगर यदा-कदा, वार-त्यौहार


अब तो ये दैनन्दिन नाटक है

प्रभु ! ये आपका कैसा त्राटक है ?

लगता है आपका तंत्र भी,

हमारे लोकतन्त्र की तरह भ्रष्ट हो गया है

इसीलिए

मानव जीवन में इतना कष्ट हो गया है


अरे हटाओ अपने दागी अधिकारियों को

जो हमारे मर्मस्थलों में ऊँगली अड़ा रहे हैं


जिन खेतों को पानी चाहिए वे सूखे हैं

और बोरियों में भरे अनाज को सड़ा रहे हैं


विनती सुनलो रब जी

हम लोग बहुत ही त्रस्त हैं

पूरा संसार आपदाग्रस्त है




Labels

Followers

Powered By Blogger

Blog Archive