Tuesday, January 12, 2010

शुभकामनाएं


सभी को सपरिवार


लोहड़ी


और


उत्तरायण पर्व की


हार्दिक


शुभकामनाएं


यदि आप में से कोई ऐसा करे तो मुझे खुशी होगी




प्यारे ब्लॉगर मित्रो !

सप्रेम अभिवादन



आज टी वी और फ़िल्मों में funny अथवा मौलिक हास्य लेखन की

बड़ी ज़रूरत हैअच्छा लेखन तुरन्त काम जाता हैयदि आप

समझते हैं कि जिस तरह की सिचुएशन कॉमेडी आजकल प्रचलन

में है, वैसी आप लिख सकते हैं और निरन्तर लिख सकते हैं तो आप

इस सुनहरे अवसर का लाभ अवश्य उठायें अपने हुनर से यश

धन दोनों कमायें



इसमे आपको सहयोग करने के लिए सर्वप्रथम मैं आपका क्लायंट

बनता हूँयों तो मैं अपनी परफ़ॉर्मेंस अपनी ही स्क्रिप्ट पर करता हूँ

लेकिन मुझे लगता है कि आप और हम मिल कर काम करें तो शायद

ब्लोगर बन्धुओं के बीच व्यावसायिक सम्बन्ध भी कायम होगा जो

कि शिष्टाचारी व्यवहार से कहीं ज़्यादा उपयोगी होता है




दोस्तों !

10 से 12 मिनट तक मंचित की जा सके, ऐसी सिचुएशन कॉमेडी

आप सामयिक विषयों पर लिखें- जैसे : फयान , तेलंगाना,

सिने अवार्ड, पा , स्वाइन फ़्लू , नैनो, मेट्रो, ओबामा को नोबेल

इत्यादि..........बहुत से विषयहैंशर्त ये है कि आपके सम्वाद

चुटीले ज़रूर हों, ख़ूब हंसाने वाले हों लेकिन अश्लील हों , साथ ही

किसी राजनीतिक या औद्योगिक व्यक्ति पर सीधा सीधा

व्यंग्य हो



इसमे आप अपनी सुविधानुसार 2/ 3/ 4 कितने भी पात्र बना

सकते हैंख्याल ये रहे कि वह दृश्य जो आप सृजित करेंगे उसे

सैट पर live परफ़ॉर्म किया जा सके


प्रत्येक स्वीकृत आलेख पर आपको रूपये दो हज़ार बतौर

पारिश्रमिक भेज दिए जायेंगेअगर बहुत ही उम्दा आलेख

हुआ तो यह राशि बढ़ भी सकती है



आप चाहें जितने आलेख भेज सकते हैंआलेख का लेखन

मौलिक हो और उसके उपयोग के सर्व अधिकार आप हमें देंगे

यह सुनिश्चित है



यदि आप में से कोई ऐसा करे तो मुझे खुशी होगीक्या आप

करना चाहेंगे ?


यदि हाँ ! तो देर मत कीजिये, तुरन्त लिखिए और जितनी

जल्दी हो सके मुझे मेल कर दीजिये

आप चाहें तो देवनागरी में भेजें , चाहें तो रोमन में -


मेरा e mail पता है :


info@albelakhatri.
com

albelakhatri@hasyahungama.com


आपके आलेख के इन्तेज़ार में........

-अलबेला खत्री

__mobile : 092287 56902




Wednesday, January 6, 2010

चावल मिल गया तो इस छोकरी की वाट लगा दूंगा




रंगलाल अपने बेटे नंगलाल के साथ ढाबे में खाना खा रहा था

संयोग से नंगलाल को चावल में एक बाल नज़र गयावह

गुस्से में चिल्लाने लगा और ढाबा मालिक को खरी-खोटी

सुनाने लगाख़ूब हंगामा कर दियाखाने के पैसे भी नहीं

दिये, उलटे स्वास्थ्य अधिकारी को बुलाने की धमकी देकर

फ़ोकट में मिरिंडा भी पी लियाबाप ने बहुत समझाया कि

बेटा जाने दे ....हो जाता है ..लेकिन वह नहीं मानाहंगामा

करके ही दम लिया


शाम को रंगलाल जब टहलने निकला तो देखा, गांधी पार्क

में उनका लाल यानी नंगलाल एक छोकरी की गोद में सिर

रख कर लेटा था और उसके बालों में मुँह मारते हुए उनकी

तारीफ़ भी किये जा रहा थारंगलाल से रहा ना गया, उसने

अपना जूता निकाल लिया और 4-5 एक साथ टिका दिये ,

"हरामखोर ! वहाँ चावल में एक बाल आगया, तो उसकी

माँ-बहन एक करदी और यहाँ इस छोकरी के बालों में मुँह

मार रहा है ?"


नंगलाल बोला,"पापा ! गुस्सा करने की ज़रूरत नहीं है, बात

उसूल की हैवहाँ चावल में बाल था तो मैंने ढाबे वाले की

वाट लगाई ... अगर यहाँ बालों में एक चावल मिल गया तो

इस छोकरी की वाट लगा दूंगा"..........हा हा हा हा

Sunday, January 3, 2010

धरती फटने वाली है




पत्नी

गुस्से में नज़र आये

तो समझना धरती फटने वाली है


और पत्नी

मुस्कुराती हुई दिखे

तो समझना जेब कटने वाली है

________अर्थात तकलीफ़ दोनों तरफ़ है ....हा हा हा हा हा हा


##
यह
पोस्ट मैंने अपनी माँ, बहन, पत्नी और

पड़ोसन भाभी व उनकी बिटिया को दिखा दी है ।


किसी को कोई आपत्ति नहीं है

-अलबेला खत्री

Saturday, January 2, 2010

न तो टाइम मिलता है न ही मूड बनता है बच्चे पैदा करने का ।




नब्बे वर्ष की एक बुज़ुर्ग महिला अस्पताल में स्वास्थ्य लाभ ले रही थी । जब वह कुछ ठीक हुई तो उसने अपनी मुख्या चिकित्सिका से पूछा

- आपको कितने बच्चे हैं डॉ० साहिबा ?

डॉक्टर - बच्चे नहीं हैं माताजी..............

बुज़ुर्ग - क्यों ? शादी नहीं हुई आपकी ?

डॉक्टर - शादी तो हुए 6 साल होगये ....लेकिन बच्चे पैदा करने का समय ही नहीं मिला। क्योंकि मेरे पति बहुत बड़े वकील हैं । बहुत व्यस्त रहते हैं , यहाँ मैं रात-दिन व्यस्त रहती हूँ । इस कारण न तो टाइम मिलता है न ही मूड बनता है बच्चे पैदा करने का ।

बुज़ुर्ग - बुरा नहीं मानना डाक्टर साहिबा, मेरे 8  बेटे हैं, 6  बेटियां हैं, बेटों और बेटियों के कुल मिला कर 79  बेटे बेटियां हैं  और उनमें से कइयों  के कई कई बेटे बेटियां हैं . कुल मिला कर 1 7 4 लोगों का हमारा कुनबा है .  और जानती हो ये पूरा परिवार खड़ा करने में मुझे व मेरे पति को कितना समय लगा होगा ?

ज़्यादा से ज़्यादा  9 0 मिनट ....हा हा हा हा 

परमपाखण्डी बकबकाचार्य  बाबा अलबेलानन्दजी परमकंस  के फ़ेसबुकिया प्रवचनों से साभार








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