Friday, June 24, 2011

बाबा नंगलालजी की तलब ने रंगलाल को भी परेशां कर दिया



परम पूज्य बाबा नंगलालजी को रात के दो बजे तलब लगी और उनका

मन बीड़ी पीने को हुआ । बीड़ी तो उन्हें बाबा रंगलालजी से मिल गई

लेकिन माचिस उनके पास भी नहीं थी।

बाबा नंगलालजी ने माचिस ढूंढी, ख़ूब ढूंढी लेकिन जब पूरी कुटिया में

कहीं माचिस नहीं मिली तो वे खीज गये

और गुस्से में आकर मोमबत्ती बुझा कर सो गये ।



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3 comments:

शिवम् मिश्रा said...

बात ही ऐसी थी गुस्सा तो आना ही था ... जरुरत के वक़्त चीज़ ना मिले तो अच्छा अच्छा आदमी खीज जाता है ... है कि नहीं भाई साहब ... ;-)

डॉ टी एस दराल said...

हा हा हा ! जय हो !

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' said...

बहुत खूब!
बगल में छोरा!
नगर में ढिंढोरा!

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